एमएसएमई क्षेत्र के लिए समर्थन और आउटरीच पहल की शुरुआत

एमएसएमई के लिए ऋण की पहुंच को आसान सक्षम बनाने के लिए 59 मिनट का ऋण पोर्टल

एमएसएमई से 25 प्रतिशत खरीद सीपीएसई द्वारा अनिवार्य

  • The Prime Minister, Narendra Modi addressing at the launch of the Support and Outreach Initiative for MSMEs, in New Delhi 

    कंपनी अधिनियम के अंतर्गत मामूली अपराधों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए अध्यादेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक समर्थन और आउटरीच कार्यक्रम की शुरूआत की। इस कार्यक्रम के भाग के रूप में, प्रधानमंत्री ने 12 प्रमुख पहलों का अनावरण किया जिसके माध्यम से पूरे देश में एमएसएमई के विस्तार, विकास और सुविधा में मदद मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन 12 निर्णयों की वे आज घोषणा कर रहे हैं वे एमएसएमई क्षेत्र के लिए एक नया अध्याय लिखेंगे। यह ध्यान में रखते हुए कि एमएसएमई भारत में प्रमुख रोजगार प्रदाताओं में से एक हैं, प्रधानमंत्री ने लुधियाना के होजरी और वाराणसी की साड़ियों सहित छोटे स्तर के उद्योग की गौरवशाली भारतीय परंपराओं को याद किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत का स्थान “ईज ऑफ डुईंग बिजनेस रैंकिंग” में पिछले चार सालों में 142 से 77 हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र को सुविधा प्रदान करने के पांच प्रमुख पहलू हैं। जिसमें ऋण तक पहुंच, बाजार तक पहुंच, प्रौद्योगिकी उन्नयन, व्यवसाय करने में आसानी, और कर्मचारियों के लिए सुरक्षा की भावना शामिल है। उन्होंने कहा कि दीवाली के उपहार के रूप में इस क्षेत्र के लिए वह 12 घोषणाएं कर रहे हैं जो कि इन पांच श्रेणियों में से प्रत्येक की आवश्यकताओं को पूरा करेगा।

 

ऋण तक पहुंच

पहली घोषणा के रूप में, प्रधानमंत्री ने एमएसएमई के लिए ऋण तक आसान पहुंच को सक्षम करने के लिए 59 मिनट के ऋण पोर्टल के शुरूआत की घोषणा की। उन्होंने कहा कि केवल 59 मिनट में सैद्धांतिक मंजूरी के बाद इस पोर्टल के माध्यम से 1 करोड़ रूपये ऋण के रूप में दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल का एक लिंक जीएसटी पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि नए भारत में किसी को भी बार-बार बैंक शाखा में जाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

दूसरी घोषणा के रूप में, प्रधानमंत्री ने सभी जीएसटी पंजीकृत एमएसएमई के लिए ताजा और वृद्धिशील ऋण पर 2 प्रतिशत ब्याज दर में छूट की घोषणा की। उदाहरण के लिए जो लोग प्री-शिपमेंट और पोस्ट शिपमेंट अवधि के लिए ऋण प्राप्त करते हैं, प्रधानमंत्री ने उनके लिए ब्याज दर में छूट में 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने की घोषणा की।

तीसरी घोषणा के रूप में, प्रधानमंत्री ने कहा कि 500 करोड़ रूपये के कारोबार वाली सभी कंपनियां को  अब अनिवार्य रूप से व्यापार प्राप्तियां ई-डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) में लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल में शामिल होने के बाद उद्यमी अपने प्राप्तियों के आधार पर बैंकों से ऋण प्राप्त कर सकेंगे। इसके माध्यम से उनके नकद चक्र की समस्याएं हो सकेंगी।

 

बाजार तक पहुंच

प्रधानमंत्री ने कहा कि उद्यमियों के लिए बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने पहले से ही कई कदम उठाए हैं। उन्होंने इस संदर्भ में अपनी चौथी घोषणा की और कहा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को एमएसएमई से अब कुल खरीद का  20 प्रतिशत की बजाय अनिवार्य रूप से 25 प्रतिशत खरीदने के लिए कहा गया है।

प्रधानमंत्री की पांचवीं घोषणा महिलाओं के उद्यमियों से संबंधित है जिसमें उन्होंने कहा कि एमएसएमई से अनिवार्य 25 प्रतिशत खरीद में से 3 प्रतिशत अब महिला उद्यमियों के लिए आरक्षित होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अबतक 1.5 लाख से अधिक आपूर्तिकर्ताओं ने जीईएम के साथ पंजीकरण किया है, जिनमें से 40,000 एमएसएमई हैं। उन्होंने कहा कि अब तक 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की लेनदेन जीईएम के माध्यम से किए गए हैं।

उन्होंने अपनी छठी घोषणा में कहा कि केंद्र सरकार के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अनिवार्य रूप से जीईएम का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें सभी वेंडर जीईएम पर पंजीकृत मिलना चाहिए।

 

प्रौद्योगिकी उन्नयन

तकनीकी उन्नयन पर आते हुएप्रधानमंत्री ने कहा कि देश भर में टूल्स रूम उत्पाद डिजाइन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने सातवीं घोषणा यह की कि पूरे देश में 20 केंद्र बनाए जाएंगे और टूल रूम के रूप में 100 स्पोक स्थापित किए जाएंगे।

 

व्यापार करने में आसानी

प्रधानमंत्री की आठवीं घोषणा में फार्मा कंपनियों में व्यवसाय को आसान करने से संबंधित थी। उन्होंने कहा कि फार्मां एमएसएमई के लिए क्लस्टर का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन समूहों को स्थापित करने के लिए लागत का 70 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा दी जाएगी।

प्रधानमंत्री की नौवीं घोषणा सरकारी प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर थी जिसमें उन्होंने कहा कि 8 श्रम कानूनों और 10 केन्दीय नियमों अंतर्गत रिटर्न साल में केवल एक बार दायर की जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अपनी दसवीं घोषणा कहा कि इंस्पेक्टर द्वारा देखी जाने वाली प्रतिष्ठानों को अब कम्प्यूटरीकृत यादृच्छिक आवंटन के माध्यम से तय किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक इकाई की स्थापना के लिए उद्यमी को दो प्रकार के सहमति की आवश्यकता होती है, पहला पर्यावरण की मंजूरी और दूसरा स्थापना संबंधित मंजूरी।

उन्होंने ग्यारहवीं घोषणा में यह कहा कि वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण कानूनों के अंतर्गत, अब दोनों को एक सहमति के रूप में विलय कर दिया गया है। आगे उन्होंने कहा कि रिटर्न को आत्म-प्रमाणीकरण के माध्यम से स्वीकार किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने बारहवीं घोषणा के रूप में उल्लेख किया कि एक अध्यादेश लाया गया है जिसके अंतर्गत कंपनी अधिनियम के तहत मामूली उल्लंघन के लिए उद्यमी को अब न्यायालय नहीं जाना पड़ेगा और उसे वे सरल प्रक्रियाओं के माध्यम से ठीक कर सकते हैं।

 

एमएसएमई क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा

प्रधानमंत्री ने एमएसएमई क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा की भी बात की। उन्होंने कहा कि उनके पास जन धन लेखाभविष्य निधि और बीमा होना सुनिश्चित करने के लिए एक मिशन को शुरू किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए ये निर्णय एक लंबा रास्ता तय करेंगे। उन्होंने कहा कि इस अगले 100 दिनों में इस आउटरीच कार्यक्रम के कार्यान्वयन की निगरानी की जाएगी।