मंहगाई के लिए जिम्मेदार न सराकर न कारोबारी- मनीश कुमार गुप्ता

71 महीनों में जो चरम पर मंहगाई है इसके लिए न सरकार दोषी है और न ही कारोबारी क्योंकि दोनों अपना काम कर रहे है इसकी जिम्मेदार दैवी आपदा है। यह बात एक सवाल पर उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष मनीश कुमार गुप्ता ने जवाहर भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में कही।
उन्होंने कहा कि कारोबारी अपनी सीमा में रह कर काम कर रहें है इसी लिए प्रदेश में एक भी आवश्यक खाद्य अधिनियम 3/7 में मुकद्दमा दर्ज नही हुआ है।
उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष ने प्रेववार्ता के दौरान बताया कि सभी लाइसेंसिंग विभागों का एक साथ जिला स्तर पर कार्यशाला आयोजित की जायगी एवं कैम्प लगाया जायेगा। उत्तर प्रदेश में व्यापारियों एवं उद्यमियों की किसी भी प्रकार की समस्या, शोषण, उत्पीड़न की दशा में तत्काल कार्यवाही की जायेगी। कृषि उत्पादन मण्डी परिषद में मण्डी परिषद में पंजीकृत व्यापारियों की किसी दुर्घटना आगजनी आदि की स्थिति में उनको एवं उनके परिवार को आर्थिक सहायता दिये जाने का प्राविधान किया जाना चाहिये।

श्री गुप्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पूर्ववर्ती सरकारों के पूर्वाग्रह एवं गलत नीतियों के कारण हजारों की संख्या में छोटी-बड़ी फैक्ट्रियाॅं बंद पड़ी हैं, जिनको उद्यमी प्रदेश सरकार की सुरक्षा एवं सहयोगी नीति से प्रभावित होकर पुनः चालू करना चाहते हैं, परन्तु पुरानी फैक्ट्री को दुबारा शुरू करने पर विद्युत भार चार्ज दुबारा लिया जा रहा है, जबकि उनमें ट्रान्सफार्मर, खम्बे, केबिल इत्यादि का चार्ज प्रथम बार उद्योग की स्थापना के समय ही ले लिया जाता है और उसी को दोबारा चालू करना होता। इसीलिये यह दोहरी व्यवस्था उद्योगों को पुनर्जीवित करने में बाधक सिद्ध हो रही है, इसलिये बंद पड़ी इकाईयों को पुनः चालू किये जाने पर उन पर दोबारा विद्युत भार चार्ज समाप्त किया जाना, जिससे उत्तर प्रदेश में बंद पड़ी अधिक-से-अधिक इकाईंयाॅं चालू हो सकें और प्रदेश का विकास हो सके, जिसके क्रियान्वयन के निर्देश मा0 मुख्यमंत्री जी ने दिये हैं।
उपाध्यक्ष व्यापारी कल्याण बोर्ड ने कहा कि व्यापारियों के कर निर्धारण के सम्बन्ध में अधिकारियों के विवेक द्वारा कोई निर्णय लिये जाने से व्यापारियों का अनावश्यक शोषण एवं उत्पीड़न होता है एवं उनका व्यापार भी प्रभावित होता है, जबकि जी0एस0टी0 की नई व्यवस्था में विवेक के आधार पर कोई भी निर्णय लिये जाने का कोई भी प्राविधान नहीं है। ऐसी परिस्थिति में पुराने मामलों में ऐसा किया जाना उचित नहीं है। मा0 मुख्यमंत्री जी द्वारा अपने भाषण में भी यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि विवेक के आधार पर निर्णय लिये जाने के अधिकार की आड़ में व्यापारियों एवं उद्यमियों का शोषण किये जाने की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त की जायेगी। अतः यह व्यवस्था पूरी तरह से समाप्त की जानी चाहिये एवं ऐसे मामलों में यदि अधिकारियों का दोष पाया जाता है तो प्रतिपूर्ति उनके वेतन से किया जाना सुनिश्चित किया जाये। सिर्फ और सिर्फ तथ्यों के आधार पर ही निर्णय लिये जाने का अधिकार दिया गया है।
श्री गुप्ता ने बताया कि व्यापारियों के माल की चैकिंग में पुलिस का हस्तक्षेप समाप्त किये जाने के पूर्व डी0जी0पी0 के निर्देशों का पालन किया जाय। आजादी के पश्चात् विभिन्न शहरों में बसे विस्थापितों की दुकाने/मकान/मार्केट की बिक्री के लिए फ्री होल्ड नीति/बिक्री नीति बनायी जा रही है। व्यापारियों एवं उद्यमियों से सम्बन्धित प्रत्येक जिले में जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किये गये हैं कि प्रतिमाह उनकी बैठकें करें। सामन्जस्य स्थापित कर एक माह के अन्दर-अन्दर उनकी समस्त समस्याओं का निराकरण करायें और जो समस्यायें जिलाधिकारी के स्तर की नहीं हैं उनका निराकरण मण्डलायुक्त के स्तर से करायें। यदि इसके बावजूद भी किसी समस्या का निराकरण नहीं होता है तो उसका निराकरण शासन स्तर पर कराना सुनिश्चित करें। प्रतिमाह प्राप्त होने वाली समस्याओं और उनके निराकरण की पूरी सूची बोर्ड के कार्यालय में प्रतिमाह भेजे जाने/अवगत कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। हर तीन माह में प्रत्येक जिले में आई समस्याओं और उनके निराकरण की समीक्षा की जाएगी और फिर भी यदि ऐसा कोई प्रकरण आता है, जिसमें व्यापारियों/उद्यमियों से सम्बन्धित समस्याओं के निराकरण करने में लापरवाही बरती गयी है तो सम्बन्धित विभागीय अधिकारी के विरूद्ध कठोर कार्यवाही करना सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक तीन माह में समीक्षा बोर्ड द्वारा की जाएगी। व्यापारी कल्याण कोष की स्थापना कर दी गयी है, जिसमें व्यापारियों/उद्यमियों की बीमारी, दुर्घटना का इलाज, प्राकृतिक आपदा इत्यादि विषयों पर पंजीकृत व्यापारियों को आर्थिक सहायता दिये जाने का प्राविधान कर दिया गया है, जिसमें आवश्यकताओं का परीक्षण करते हुए बोर्ड सम्बन्धित व्यापारियों को सहायता कोष से सहायता पहुॅचाएगा। पुराना स्क्रैप वस्तुओं पर जी0एस0टी0 की दर 18 प्रतिशत व 12 प्रतिशत से घटाकर एक समान दर किये जाने पर विचार किया जा रहा है।
श्री गुप्ता ने बताया कि ऐसे व्यापारी जिनकी आय 2.50 लाख के लगभग है, जिसमें सबसे छोटे व्यापारी फेरी वाले, मोची, नाई इत्यादि आते हैं, उनको भी आयुष्मान योजना के अन्तर्गत चिकित्सा सुविधा दिये जाने का निर्णय व्यापारी कल्याण बोर्ड द्वारा लिया गया है। फेरीनीति के अनुसार रजिस्टर्ड प्रत्येक व्यवसायी को रोजगार दिये जाने के लिए सरकार कटिबद्ध है। बस स्टेशनों एवं रेलवे स्टेशनों पर व्यापारीगणों के लिये वेटिंगरुम और जन-सुविधाओं के लिये हेल्प डेस्क बनायी जायेगी। होटल को उद्योग का दर्जा दिया जायेगा। मण्डी शुल्क को कुछ वस्तुओं पर कम करने का कार्य किया जायेगा। रेलवे स्टेशनों पर माल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जायेगा। जी0एस0टी0 विभाग की प्रत्येक शाखा के अधिकारियों को जी0एस0टी0 व्यवस्था की गहन जानकारी हेतु समुचित प्रशिक्षण दिये जाने एवं तकनीकी आधार पर उत्पीड़न से व्यापारियों में भय एवं भ्रष्टाचार के वातावरण से मुक्ति हेतु प्रभावी कदम उठाने हेतु कारगर कार्यवाही के निर्देश दिये गये। ऐसी गाड़ियां जिनमें कुछ व्यापारियों का माल बिल वाउचर सहित है तथ कुछ व्यापारियों का माल बिना बिल बाउचर के है तो पूरी गाड़ी को सीज नहीं किया जाये। विभिन्न विभागों द्वारा व्यापारियों के हित में संचालित योजनाओं/नीतियों को एक ही प्लेटफार्म उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण बोर्ड से संचालित किया जाये और इनका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये।

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