राजभवन में भी प्राकृतिक खेती की शुरूआत होगी– राज्यपाल

 

लोक भारती की मासिक पत्रिका ‘लोक सम्मान’ के ‘गो-आधारित प्राकृतिक कृषि’ विशेषांक का विमोचन

राजभवन में भी प्राकृतिक खेती की शुरूआत होगी, क्योंकि यहां गो-आधारित सभी संसाधन मौजूद हैं। यह बात लोक भारती की मासिक पत्रिका ‘लोक सम्मान’ के ‘गो-आधारित प्राकृतिक कृषि’ विशेषांक का लोकार्पण करते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में कही।
उन्होंने कहा कि मानव स्वास्थ्य के दृष्टिगत वैज्ञानिक भी मोटे अनाज के प्रयोग पर बल दे रहे हैं। आज से 50-60 साल पहले जब मोटे अनाज का लोग प्रयोग करते थे तो हृष्ठ-पुष्ठ रहा करते थे और बीमारियां भी कम होती थी। जब से खाद्यान्न उत्पादन में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बढ़ा है तब से उत्पादन के साथ-साथ बीमारियां भी बढ़ी हैं।
राज्यपाल ने कार्यक्रम में उपस्थित प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती में आप लोगों के योगदान का फायदा आने वाली पीढ़ी को निश्चित रूप से मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप लोग अपने पास पड़ोस के किसानों को भी गो-आधारित प्राकृतिक खेती से जोड़ेंगे। इससे न केवल कृषि लागत में कमी आयेगी बल्कि किसान की आमदनी में भी अपेक्षित वृद्धि होगी। उन्होंने लोक भारती की मासिक पत्रिका ‘लोक सम्मान’ के ‘गो-आधारित प्राकृतिक कृषि’ विशेषांक’ की सराहना करते हुए कि यह विशेषांक किसानों के लिये लाभदायक होगा।
कार्यक्रम में लोक भारती के अध्यक्ष प्रोफेसर ए0पी0 तिवारी तथा संगठन मंत्री बृजेन्द्र पाल सिंह, श्रीकृष्ण चैधरी ने भी प्राकृतिक खेती पर अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर कृषि निदेशक सोराज सिंह के अलावा बड़ी संख्या में किसाान एवं गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

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