उर्वरक क्षेत्र में और ज्यादा सुगमता के लिए सरकार प्रयासरत- डी.वी. सदानंद गौडा

मोहम्मद मुबिन
एनडीए सरकार उर्वरक क्षेत्र में व्यवसाय करने की सुगमता के लिए सभी संभव प्रयास कर रही है जिससे कि यह वास्तविक अर्थों में आत्म-निर्भर बन सके और कृषक समुदाय की बेहतर ढंग से सेवा की जा सके। यह बात केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री डी.वी. सदानंद गौडा ने कही।
उन्होंने बताया कि उर्वरक विभाग ने विद्यमान डीबीटी प्रणाली को अनुकूल बनाने के लिए जुलाई 2019 में एक अधिक किसान अनुकूल तथा अधिक यूजर फ्रेंडली बनाने के लिए डीबीटी 2.0 वर्जन लागू किया है। डीबीटी 2.0 वर्जन में तीन घटक हैं जिनके नाम हैंः-डीबीटी डैशबोर्ड, पीओएस 3.0सॉफ्टवेयर और डेस्कटॉप पीओएस वर्जन।

डीबीटी डैशबोर्ड विभिन्न उर्वरकों की आपूर्ति उपलब्धता आवश्यकता की स्थिति के बारे में सटीक वास्तविक समय जानकारी उपलब्ध कराता है। इसे ीजजचेरूध्ध्नतअंतंा.दपब.पद पर किसी भी आम व्यक्ति द्वारा एक्सेस किया जा सकता है।

पीओएस 3.0सॉफ्टवेयर खरीदारों के विभिन्न वर्गों को बिक्री को कैप्चर करता है, विविध भाषाओं में विक्रय प्राप्तियों को जनेरेट करता है तथा उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों को मृदा स्वास्थ्य अनुशंसाएं उपलब्ध कराता है। डेस्कटॉप पीओएस वर्जनएक वैकल्पिक या पीओएस डिवाइसेज को अतिरिक्त सुविधाएं हैं जो अधिक सुदृढ़ तथा सुरक्षित है।

उर्वरकों में डीबीटी को दो पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं जिनके नाम हैं-25.09.2019 को ‘गर्वनेंस के लिए स्कॉच गोल्ड अवार्ड’तथा 6 नवंबर 2019 को ‘गर्वनेंस नाऊ’डिजिटल रूपांतरण पुरस्कार।
उर्वरकों के लिए आपूर्ति नेटवर्क को सरल बनाने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को रेखांकित करते हुए श्री गौड़ा ने कहा कि परिवहन के एक अतिरिक्त माध्यम के रूप में तटीय जहाजरानी को बढ़ावा दिया गया है। इसके लिए 17.06.2019 तथा 18.09.2019 को तटीय जहाजरानी या और अंतर्देशीय जलमार्गों के जरिये सब्सिडीप्राप्त उर्वरकों के वितरण के लिए माल भाड़ा संवितरण की प्रतिपूर्ति की नीति की घोषणा की गई। 2019-20 के दौरान, तटीय जहाजरानी के जरिये 1.14 एलएमटी उर्वरक ढोया जा चुका है।

यूरिया इकाइयों के लिए लागत निर्धारण नियमों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीसीईए के अनुमोदन के साथ दिनांक 30 मार्च, 2020 की अधिसूचना के द्वारा उनके विभाग ने संशोधित एनपीएस-3 में अस्पष्टता को हटा दिया। इससे संशोधित एनपीएस-3 का सुगम कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा जिसका परिणाम 30 यूरिया इकाइयों को 350 रुपये एमटी की अतिरिक्त निर्धारित लागत की मंजूरी तथा यूरिया इकाइयों को 150 रुपये एमटी की विशेष क्षतिपूर्ति की मंजूरी के रूप में सामने आएगा जो 30 वर्ष से अधिक पुराने हैं तथा गैस में रूपांतरित हो जाएंगे जो इन इकाइयों को नियमित उत्पादन के लिए व्यवहार्य बनाये रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा। यह यूरिया इकाइयों के सतत प्रचालन को भी सुगम बनायेगा जिसका परिणाम किसानों को यूरिया की नियमित आपूर्ति के रूप में सामने आएगा।

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