बायें फेफड़े से लिवर और आंतों को निकालकर बेहाल मरीज को दिया नया जीवन

-सहारा हास्पिटल में जटिल सर्जरी में मिली सफलता
पूजा श्रीवास्तव
लखनऊ। आजमगढ़ निवासी 35 वर्षीय ताजुद्द्दाीन पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट हैं। उनके शरीर का वजन तेजी से बढ़ने लगा और कोई काम करने के बाद उन्हें जल्दी थकान महसूस होने लगी, क्योंकि वह खुद ही मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हैं, इसलिए उन्होंने अपना एक्स-रे कराया, जिसमें दायें फेफड़े में सूजन थी, इस पर स्थानीय डाक्टर से सलाह ली लेकिन आराम नहीं मिला। उनकी समस्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी। जब किसी काम के लिए झुकते और पेट पर दबाव पड़ता तो खांसी आने लगती और चेस्ट में भारीपन महसूस करते। गैस भी बहुत बनने लगती थी। इसके बाद उन्होंने आजमगढ़ में डाक्टरों के साथ साथ चेस्ट फिजीशियन से परामर्श लिया । डॉक्टर ने बताया कि मरीज को चेस्ट डायफ्रागमैटिक हार्निया है लेकिन यह आपरेशन आजमगढ़ में नहीं हो पाएगा, तब मरीज लखनऊ आया और लखनऊ में मरीज ने कई बड़े हास्पिटल में चेकअप करवाया लेकिन मरीज को इलाज के लिए मना कर दिया। तब मरीज ने गोमतीनगर लखनऊ स्थित सहारा हास्पिटल के वरिष्ठ गैस्ट्रोसर्जन डा. अजय यादव को दिखाकर परामर्श लिया तो जांच के दौरान मरीज बीस सेंकेंड से ज्यादा अपनी सांस रोक नहीं पा रहा था। सहारा हॉस्पिटल में सीटी स्कैन में पता चला कि उसके एक फेफड़े में डायफ्रागमैटिक हार्निया है। सभी जांच होने के बाद पता चला कि आंतें और लिवर डायफ्राम में छेद करके बायें फेफड़े की जगह पर फंसे हुए थे जो कि पैदायशी था। डॉ. अजय ने सभी जांचे कराने के बाद जटिल सर्जरी को करने का निर्णय लिया। उन्होंने दूरबीन विधि से इस बड़े आपरेशन में सफलता पायी। यह आपरेशन करीब पांच घंटे तक चला। 5 दिन भर्ती करने के बाद जब मरीज पूर्ण रूप से स्वस्थ हुआ तो उसको छुट्टी दी गयी। बेहतर इलाज मिलने से प्रसन्न मरीज ने डॉं अजय यादव और हास्पिटल प्रबंधन के प्रति आभार जताया।
सहारा इंडिया परिवार के वरिष्ठ सलाहकार अनिल विक्रम सिंह जी ने बताया कि हमारे मुख्य अभिभावक माननीय सहाराश्री ने विश्वस्तरीय हास्पिटल दिया है, जहां अनुभवी चिकित्सक कई प्रकार के बड़े जटिल आपरेशन सफलतापूर्वक सम्पन्न कर रहे हैं। ऐसे में हास्पिटल निरंतर नये आयाम स्थापित कर रहा है और मरीज को सेवाएं दे रहे हैं।

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