अब जटिल एंजियोप्लास्टी करना हुआ और आसान, नहीं करनी पड़ेगी बायपास सर्जरी

-प्रदेश का पहला सहारा हास्पिटल जहां आईवीएल तकनीक से एंजियोप्लास्टी संभव
लखनऊ। सहारा हास्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ एवं उनकी टीम ने एक विशेष प्रकार के उपकरण का प्रयोग करते हुए एक ऐसे मरीज की एंजियोप्लास्टी करके उसको नया जीवन दिया, जिससे सामान्यतरू मरीजों को बायपास सर्जरी की एकमात्र विकल्प होता है।
सहारा हास्पिटल में दिखाने आए एक मरीज जिनकी
एंजियोप्लास्टी 8 साल पहले हुई थी, वह सीने में दर्द की शिकायत होने पर भर्ती हुए। एंजियोग्राफी से पता चला कि उनको जो 8 साल पहले स्टेंट लगाया गया था। वह पूर्णतया बंद हो गया। इसके साथ ही उनकी बाकी दोनों कोरोनरी आर्टरी भी खराब हालत में थी।
डा. गौतम स्वरूप ने बताया कि यदि ब्लाकेज बहुत पुराना होता है तो उसमें कैल्शियम इकट्ठा होने से कोरोनरी आर्टरी को सख्त बना देता है और यदि इसमें भी यदि स्टेंट ब्लाक हो गया हो तो उसमें कैल्शियम जल्दी इकठ्ठा हो जाता है। डायबिटीज के मरीजों में ऐसी संभावना ज्यादा रहती है। ऐसे मरीजों में यदि एंजियोप्लास्टी का प्रयास किया जाए तो कैल्शियम इकट्ठा होने की वजह से स्टेंट डालना मुश्किल होता है। यदि उसका पुराना स्टेंट ब्लॉक हो जाए तो यह एंजियोप्लास्टी लगभग असंभव होती है। ऐसे में मरीजों को डाक्टर बायपास सर्जरी की सलाह देते है, क्योंकि इसके बाद यही एकमात्र उपचार बचता है। इस तरीके की कोरोनरी आर्टरी जो पूरी तरह से बंद होती है, उनको सी.टी.ओ कहते हैं, यदि इसमें कैल्शियम इकट्ठा हो जाए तो ऐसी एंजियोप्लास्टी करना जोखिम और चुनौतीपूर्ण होता है। एंजियोप्लास्टी के दौरान कोरोनरी आर्टरी के फटने एवं अकस्मात मृत्यु होने की आशंका प्रबल होती है इसलिए ज्यादातर डॉ. ऐसी एंजियोप्लास्टी नहीं करते
डा. गौतम स्वरूप ने बताया कि एक नयी तकनीक, जिसे आईवीएल (इंट्रावैस्कुलर लिथोट्रिप्सी) के जरिए जटिल एंजियोप्लास्टी करना भी आसान हो गया है। यह एक अल्ट्रासोनिकवेव कैथेटर होता है जो अल्ट्रासोनिक वेव से कैल्शियम को ब्रेक करता है, जिससे स्टंट डालने में आसानी हो जाती है। सहारा हास्पिटल में इस विधि से जटिल सी.टी.ओ एंजियोप्लास्टी करने वाला उत्तर प्रदेश का पहला अस्पताल है, जिसमें मरीज की तीनों कोरनरी आर्टरी बंद थी, जिसे एक आर्टरी के दोनों स्टंट 8 साल पहले सौ प्रतिशत बंद हो गये थे। ऐसे मरीज के इलाज में सफलता मिली है।
डा. गौतम स्वरूप एवं उनकी टीम ने आईवीएल ट्रीटमेन्ट से इस मरीज की एंजियोप्लास्टी करने में सफलता पायी। मरीज की बायपास सर्जरी से बचाया और उसे नया जीवन भी दिया। डा. स्वरूप ने बताया कि आईवीएल तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान है जो 70 या 80 वर्ष आयु वाले बुजुर्ग हैं या अन्य कारणों से बायपास सर्जरी नहीं करा सकते हैं। आईवीएल तकनीक बहुत ही सुरक्षित है जो भविष्य में बहुत से लोगों के बायपास सर्जरी से बचा सकता है।

सहारा इंडिया परिवार के सीनियर एडवाइजर अनिल विक्रम सिंह जी ने बताया कि हमारे अभिभावक माननीय सहाराश्री ने ऐसा हास्पिटल दिया है, जहां जटिल से जटिल मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा हैं। ऐसे मरीजों को उपचार के लिए दिल्ली और मुम्बई के चक्कर लगाने पड़ते थे लेकिन अब सहारा हास्पिटल में एक ही छत के नीचे मरीजों को सभी सुविधा मुहैया करायी जा रही हैं।

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