लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से पैक्रियाज का सफल इलाज

-सहारा हास्पिटल के वरिष्ठ गैस्ट्रो, लैप्रोस्कोपिक एवं बैरियाट्रिक सर्जन डा. पुनीत गुप्ता ने गंभीर मरीज की बचायी जान

लखनऊ। एनएबीएच एवं एनएबीएल मान्यता प्राप्त सहारा हास्पिटल में मल्टी आर्गन फेल्योर व एक्यूट ट्रॉमोटिक पैक्रिटाइटिस  स्थिति में मारणासन्न अवस्था में पहुंचे मरीज को बेहतर इलाज मिला।

इलाहाबाद के करछना बाजार में रहने वाले 23 वर्षीय युवक जो कि खुद पेशे से एक्सरे टेक्नीशियन हैं, बाइक चलते समय उसका एक्सीडेंट हो गया। उसके पेट में काफी असहनीय दर्द था। फिर इलाहाबाद के एक अस्पताल में इलाज के लिए पांच दिन एडमिट रहा। हालांकि, इस उपचार का कोई खास लाभ नहीं हुआ। लोगों की सलाह पर फिर से इलाहाबाद के एक और बड़े हास्पिटल में दिखाया, जहां गैस्ट्रो विशेषज्ञ डाक्टर ने उसका सीटी स्कैन कराया। उसकी रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने कहा कि इसका इलाज यहां संभव नहीं है और लखनऊ के पीजीआई के लिए रेफर कर दिया लेकिन लॉकडाउन और कोरोना की वजह से वहां मरीज को बेड नहीं मिला। इस पर उसके एक परिचित डाक्टर ने सहारा हास्पिटल में डॉ पुनीत गुप्ता से उपचार कराने की सलाह दी। सहारा हास्पिटल की इमरजेंसी में वरिष्ठ गैस्ट्रो, लैप्रोस्कोपिक एवं बैरियाट्रिक सर्जन डाक्टर पुनीत गुप्ता के निर्देशन में मरीज को भर्ती किया गया। जांच में पता चला कि मरीज के कई आर्गन फेल्योर यानि वह मल्टी आर्गन फेल्योर की स्थिति में आ गया था। एक्यूट ट्रामाटिक पैक्रियाइटिस का शिकार था और उसका पैंक्रियाज बीच में से लगभग ट्रान्सैक्ट हो गया था और उसके बचने की उम्मीद बहुत कम थी। मरीज की गम्भीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए  डा. पुनीत गुप्ता ने मरीज का इलाज आई सी यू में  करने का निर्णय लिया और लगभग 2 हफ्ते की मेहनत के बाद हालत में सुधार आया। हालत ठीक होने पर मरीज को छुट्टी दी गयी। डिस्चार्ज के बाद मरीज की जान तो बच गई पर वो अब भी पूरा खाना नहीं खा पा रहा था और उसका वजन कम हो रहा था। मरीज के पेट में पैंक्रियटाइटिस की वजह से एक बड़ी सी सिस्ट बन गई थी जो कि अमाशय के ऊपर प्रेशर डाल रही थी जिसकी वजह से मरीज खाना नहीं खा पा रहा था तब डा. पुनीत गुप्ता ने आपरेशन की सलाह दी और उन्होंने अपनी दक्षता और अनुभव के साथ आपरेशन करके दूरबीन विधि से सिस्ट और अमाशय के बीच में एक कृत्रिम रास्ता बनाकर पैंक्रियाज के खराब हिस्से को निकाल दिया और सिस्ट को आमाशय द्वारा खाली कर दिया गया, इससे भविष्य में होने वाली परेशानी की खत्म हो गयी। डा. पुनीत गुप्ता ने बताया कि यह आपरेशन दूरबीन विधि से किया गया (लैप्रोस्कोपिक सिस्टोगैसटैक्टमी पैंक्रियाटिक नैक्ररोसैक्टमी )Laparoscopic Cystogastrostomy with pancreatic necrosectomy) जिससे बड़ा चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ी और मरीज की रिकवरी भी जल्दी हो गई। बेहतर इलाज पाकर मरीज और परिजनों ने अस्पताल के डाक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और प्रबंधन के प्रति आभार जताया।

सहारा इंडिया परिवार के सीनियर एडवाइजर  अनिल विक्रम सिंह जी ने बताया कि हमारे अभिभावक  सहारा ने उच्चकोटि का विश्वस्तरीय हास्पिटल दिया है, जहां हर विभाग के चिकित्सक अपने अनुभव और दक्षता से एक ही छत के नीचे सभी सुविधाओं के साथ मरीजों को बेहतर उपचार मुहैया करा रहे हैं। बेहतर कार्य के चलते हास्पिटल नित नये आयाम बना रहा है।

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