ममत्व, साहित्य व लोकसेवा का अनोखा मिलाफ याने स्व. मृदुला सिन्हा – राम नाईक

मुंबई, गोवा की पूर्व राज्यपाल व भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ महिला नेता मृदुला सिन्हा के निधन से मैं व्यथित हूं. मेरी छोटी बहन चल बसी!”, इन शब्दों में उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने मृदुला सिन्हा के निधन पर शोक जताया.

चालीस वर्षों से भी लंबे समय तक सहयोगी – मित्र रहीं मृदुला सिन्हा की यादें उजागर करते हुए राम नाईक ने कहा, “राजनीती में रहते हुए कुछ चंद सहयोगीयों से ही व्यक्तिगत व पारिवारिक मित्रता होती है. मृदुला जी उनमें अग्रेसर थी. वे एक वरिष्ठ साहित्यिक भी थी फिर भी उन्होंने मेरी पुस्तक (हिंदी) ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ को न केवल प्रस्तावना लिखी, तो राज्यपाल पद की व्यस्तता होते हुए भी पांडू लिपि में कई सुधार कर दिए. भारतीय जनता पार्टी की पहली पिढ़ी की वे महिला नेता थी. गोवा राज्यपाल के नाते काम करते हुए फुल या उपहार के बदले वे मात्र फल स्वीकार करती थी और इकठ्ठा फलों को जरुरतमंदों में बाँट कर मृदुला जी ने एक नयी अनुकरणीय परंपरा प्रारंभ की थी. मेरी उन्हें भावभिनी श्रद्धांजलि!”

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