तय्यबा की पहली बरसी पर हम तेरे इसार व कुर्बानी के जज्बे को सलाम करते हैं

पं अरुण कुमार व्यास

तय्यबा मरहूमा लखनऊ के करामत हुसैन गर्ल्स कॉलेज की बी0ए0 की तालिबा थी। लखनऊ के हुसैनाबाद घंटाघर के शहरियत तरमीमी कानून के खिलाफ धरना पर मुस्तकिल महीनों सर्दी की सख्त तरीन रातों में खुले आसमान के नीचे रात गुजारती रहीं। जालिम हुकमरानों ने तिरपाल तक लगाने न दिया। रात में बारिश में भीग जाने के सबब बीमार पड़ गई। चंद रोज अस्पताल में इलाज चलता रहा। अल्लाह ने उस के मुकद्दर में शहादत लिखी थी। 23 फरवरी 2020 को इंतेकाल कर गई। हम उसे तय्यबा मरहूमा कहने पर दिली रंज व गम महसूस करते हैं।
तय्यबा मरहूमा लखनऊ में अपने भरे हुए खानदान ही को नहीं बल्कि पूरे मुल्क को सोगवार कर गईं।
धरने पर इन की लगन, इन की सलाहियतें इन के कुर्बानी के जज्बे ने सब को तड़पा दिया।
तय्यबा मरहूमा तो एक गुमनाम तालिबा थी लेकिन तेरी कुर्बानी के जज्बे ने तुझे मुल्क गीर शोहरत का हामिल बना दिया। यह अल्लाह का इनाम है।
23 फरवरी 2021 को तेरे इंतेकाल की पहली बरसी पर हम तेरे इसार व कुर्बानी के जज्बे को सलाम करते हैं। और हम अल्लाह से दुआ-गो है कि अल्लाह तुझे और तेरे साथ धरने पर बैठी मरहूमा फरीदा व मरहूमा अज़ीमुन्निसा को इनामात से नवाज दे और आज और आने वाले कल के नौजवानों को आप जैसे लोगो की कुरबानी के जज़्बात अता करे कि कौम बावकार बन सके।
इस प्रोग्राम में मुख्य अतिथि के तौर पर धरने पर मुस्तकिल शिरकत करने वाली पूजा शुक्ला ने भी शिरकत की और शहीद होने वालों को खराजे अकीदत पेश किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से से बलिहारी बाबू, पूर्व सांसद, तारिक शमीम, मुस्तजाब आलम एवं खालिद आज़मी मौजूद रहे।

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