भारत- वियतनाम में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश पर चर्चा

वियतनाम निवेश के कई आकर्षक कारण प्रदान करता है जैसे कि वियतनाम के बाजार में आसानी से पहुंच, अनुकूल निवेश नीतियां, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, आर्थिक विकास, राजनीतिक स्थिरता, कम श्रम लागत और एक युवा कार्यबल। डिफेन्स प्रोडक्शन कॉरिडोर तमिलनाडु के बाद यूपी में स्थापित किया गया है। यह क्षेत्र भारतीय डैडम् और हमारे समकक्ष वियतनाम के लिए अवसरों से भरा है। हम दोनों इस क्षेत्र में भी द्विपक्षीय रूप से समर्थन साझा कर सकते हैं।
श्री कुमार ने आगे कहा कि हम दोनों देशों में एमएसएमई के लिए आपके साथ एक सहयोग स्थापित करना चाहते हैं ताकि विकास और संवर्धन अधिक प्रभावी ढंग से हो सके। आने वाले समय में, हम कई कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं जिससे दोनों देशों के उद्यमियों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
भारत में एम्बेसडर ऑफ वियतनाम सैन चाऊ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वियतनाम हाल ही में अपनी आर्थिक विकास दर को 3ः से बढ़ाया है जो कि अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए एक अच्छा संकेत है। भारतीय कंपनियां अपनी राजनीतिक स्थिरता के कारण वियतनाम में आसानी से निवेश कर सकती हैं। ऐसे क्षेत्र जिनमें वियतनाम भारत से निवेश की तलाश में हैं, वे हैं ऑटोमोबाइल, ग्रेनाइट और पत्थर, कपड़ा, घरेलू उपकरण, कृषि और फार्मास्यूटिकल्स। वियतनाम भारत को आत्मनिर्भर बनाने के माननीय प्रधान मंत्री के उद्देश्य से भी प्रभावित है और भारतीय व्यवसायों को वियतनाम में अपने कार्यों को स्थापित करने के लिए आमंत्रित करता है ।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष अग्रवाल ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच वर्षों से द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। वियतनाम को आईटी और व्यावसायिक सेवाएँ, मशीनरी उपकरण, इस्पात और कपड़ा और रेशे उपलब्ध कराने के लिए भारत में बहुत अधिक विकास क्षमता है ।
इसके अलावा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा कि वियतनाम में निवेश करने के मुख्य कारण फ्री ट्रेड अग्रीमेंट के तेहत आसानी से वियतनाम के बाजार में निवेश करना संभव है, वियतनाम ने विदेशी निवेशकों के लिए प्रोत्साहन के प्रावधान है । वियतनाम के पास देश में 325 से अधिक राज्य-समर्थित औद्योगिक पार्क हैं, वियतनाम की स्थिर और बढ़ती अर्थव्यवस्था, वियतनाम ने निवेश को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए अपने नियमों में कई संशोधन किए हैं और वियतनाम में अधिकांश व्यावसायिक लाइनों के लिए न्यूनतम पूंजी की आवश्यकता भी नहीं होती ।
दोनों देशों के उद्योग प्रतिनिधियों ने भी अपने क्षेत्रों में अपनी आवश्यकताओं और अवसरों की जानकारी प्रस्तुत की।
अंत में, आईआईए के निर्यात-आयात समिति के चेयरमैन द्वारा धन्यवाद प्रस्तुत करते हुए बैठक का समापन किया गया ।

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