रिटायरमेंट के दो दशक बाद अपना पहला काव्य संग्रह लेकर आए 80 वर्षीय ‘युवा’ कवि

लखनऊ, फरवरी 18, 2021: अमूमन जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट के बाद अपनी अगली पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंप अपना जीवन व्यतीत करते हैं, उस उम्र में श्री योगेन्द्र नाथ द्विवेदी अपना पहला काव्य संग्रह लाए हैं. इस काव्य संग्रह का विमोचन गुरुवार, 18 फरवरी की शाम इंदिरानगर स्थित कैफ़े रेपर्टवाह में पद्मश्री श्री योगेश प्रवीन जी के कर-कमलों से हुआ. पेशे से बैंकर रहे, जीवन की शतकीय पारी की ओर अग्रसर श्री द्विवेदी ने अपने उम्र की आठवीं दहाई में अपना पहला काव्य संग्रह लोकार्पित करने का निर्णय लेकर उन लोगों को प्रेरणा दी है, जो यह मान बैठे हैं कि रिटायरमेंट के बाद जीवन समाप्ति की ओर अग्रसर हो जाता है. उनके इस काव्य संग्रह में उनकी रचित 53 कविताओं का संकलन है, जिनमें से अधिकांश उन्होंने बैंक की सर्विस से रिटायर होने के बाद लिखी हैं.

श्री द्विवेदी के काव्य संग्रह के विमोचन कार्यक्रम की शुरुआत मशहूर किस्सा गो श्री हिमांशु बाजपेयी द्वारा मेहमानों का स्वागत और लेखक श्री योगेंद्र नाथ द्विवेदी  का परिचय देने के साथ हुई. उसके बाद पद्मश्री श्री योगेश प्रवीन जी के करकमलों से पुस्तक का विमोचन हुआ, जिसके बाद उन्होंने ‘प्रेम पयोधि’ और इसके ‘युवा’ रचयिता श्री द्विवेदी के विषय मे चर्चा की. श्री हिमांशु बाजपेयी ने श्री द्विवेदी के सृजनात्मक/रचनात्मक सफ़र पर उनसे साक्षात्कार कर वहां उपस्थित लोगों को उनके जीवन के अनछुए पहलुओं से रूबरू कराया.

इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में कवि डॉ सुरेश, विशिष्ट अतिथि के रूप में कवि गोपाल चतुर्वेदी, कवि श्री पवन जी, कवि श्री मनीष शुक्ल और श्री अभिषेक जी जैसे कवियों ने शिरकत की. कार्यक्रम का औपचारिक समापन श्री योगेंद्र नाथ द्विवेदी के पुत्र और डीजीएम- पर्सनल बैंकिंग, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, श्री नीलेश द्विवेदी द्वारा कार्यक्रम में आए में मेहमानों को आभार ज्ञापित करने के साथ हुआ.

पहली जनवरी, 1942 को इटावा में जन्में श्री योगेंद्र नाथ द्विवेदी दर्शनशास्त्र में एम.ए. और फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एल.एल.बी.करने के बाद सन 1966 में प्रतिष्ठित भारतीय स्टेट बैंक से परिवीक्षाधीन अधिकारी (पी.ओ.) के बतौर जुड़े और फिर यहीं से दिसम्बर 2001 में विभिन्न ज़िम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सेवानिवृत्त हुए. वे बताते हैं कि बैंक की नौकरी के दौरान एक बार वे काव्य-पाठ के लिए गए तो उनके घर के बड़े-बुजुर्गों ने इस पर आपत्ति की. उसके बाद उन्होंने बहुत दिनों तक अपने शौक को लोगों के सामने जाहिर नहीं होने दिया.

श्री द्विवेदी बताते हैं कि उन्हें स्व. गोपालदस ‘नीरज’ जी के सानिध्य में रहने का सौभाग्य मिला. इन्हीं काव्यात्मक मेल-मुलाकातों के दौर में ‘नीरज’ जी ने उनकी एक कविता की बहुत तारीफ़ की. वे बताते हैं कि इससे उन्हें बहुत हौसला मिला. रिटायरमेंट के बाद उनके पुत्र श्री नीलेश द्विवेदी जो कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के लोकल हेड ऑफिस में बतौर डिप्टी जनरल मैनेजर-पर्सनल बैंकिंग तैनात हैं, ने अपने पिता जी से आग्रह किया वे अपनी कविताओं को एक संग्रह का रूप देकर दुनिया के सामने लाएं. अन्तर्मुखी स्वभाव के श्री योगेंद्र नाथ द्विवेदी ने काफी सोच-विचार कर यह बीड़ा उठाया कि जीवन भर जो कविताएं वे टुकड़ों में रचते रहे, उनमें कुछ और रचनाएँ शामिल कर इन्हें संग्रह का रूप देंगे.

श्री नीलेश द्विवेदी, डिप्टी जनरल मैनेजर-पर्सनल बैंकिंग,स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया अपने पिता के पहले काव्य संग्रह को लेकर काफी भावुक हैं. वे कहते हैं, “यह मेरे और परिवार के लिए भावनात्मक और सृजनात्मक रूप से बेहद ही विलक्षण क्षण है. पिता जी ने उस उम्र में अपना काव्य संग्रह लोकार्पित करने का निर्णय लिया, जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट के बाद कलम रख देते हैं. उनका यह प्रयास निश्चित तौर पर समाज को सन्देश देगा कि रिटायरमेंट के बाद भी आप अपने आप को सृजनात्मक रूप से सक्रिय रखा, समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन सकते हैं.”

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