सरकार सामाजिक उत्थान करने वाली संस्थाओं को कंपनी में तब्दली करने की वकालत कर रही है-डा मुकेश

तंबाकू के अवैध व्यापार और इसके सेवन से हानि पर
शोध ने बढ़ाये कदम
सरकार सामाजिक उत्थान करने वाली संस्थाओं को कंपनी में तब्दली करने की वकालत कर रही है कम्पनी का मकसद सिर्फ और सिर्फ मुनाफावसूली होता है। ये बातें तम्बाकू उद्योग के अवैध व्यापार ,एवं टैक्स चोरी के मामलों पर शोध रिपोर्ट के विमोचन पर डा मुकेश ने गिरी विकास अध्ययन संस्थान में कहीं।
डा मुकेश ने कहा कि एड््स जैसी बीमारियों के लिए विदेश से पैसा मिलता है तो काम होता है लेकिन जैसे- जैस विदेशी फण्ड कम मिलने लगता है तो मिशन कमजोर होने लगता है जबकि इन कामों में केंद्र और राज्य सरकारों को अत्मनिर्भर बन कर काम करना चाहिए लेकिन वे ऐसा नही करती है।
इस अवसर पर डा० सी. एस. वर्मा ने अपने उद्बोधन में बताया कि शोध में उत्तर प्रदेश में पिछले 10 वर्षों में तम्बाकू कंपनियों द्वारा 16 मामलों में कुल 3196 .63 लाख रूपये के टैक्स चोरी के मामलों का पता चलता है जिसमें सिगरेट, पान मसाला व अन्य तम्बाकू उत्पादों के अवैध व्यापार एवं टैक्स चोरी के मामले शामिल हैं उन्होंने कहा कि तम्बाकू क्षेत्र. की चुनौतियों के लिए सरकारी, अंतर्राष्ट्रीय एजेन्सियां, रिसर्च संस्थानों तथा विविध सोसाइटी आॅर्गनाइजेशन को एक साथ आना होगा। उन्होंने इस पर एक फैक्ट शीट भी जारी की।

डाॅ० मंसूर अली, गिरि विकास अध्ययन संस्थान, ने कहा एक चीज स्पष्ट है किः जब सरकार कर-राजस्व से कम पैसा जुटा पाती है, तो उसके पास अपने नागरिकों और उनके स्वास्थ्य पर खर्च करने के लिए कम पैसे होते हैं। इसलिए जब अवैध तंबाकू व्यापार होता है, तो सरकारों के पास कल्याणकारी कार्यों में खर्च करने के लिए कर राजस्व कम होता है, और लोग तंबाकू का अधिक सेवन करते हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य खराब होता है।
शोध रिपोर्ट के अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2009-2018 के बीच की कम से कम 108 सीएजी रिपोर्टों में यह दर्शाया गया है कि तंबाकू उद्योग कर का भुगतान करने से बचने और अवैध रूप से अपने उत्पादों को बेचने के लिए कई साधनों का प्रयोग करता है। इन रिपोर्टों के अनुसार, तंबाकू उद्योग ने सरकार को कम से कम रु0 390.38 करोड़ का नुकसान किया है।
भारतीय संसद के रिकार्ड तंबाकू उद्योग का आपराधिक नेटवर्क से संबंध तथा तंबाकू उद्योग द्वारा उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क की चोरी के कम से कम 189 केस दर्शाते हैं, जो रु0 100 करोड़ के हैं, जिसमें से कम से कम 25 केस (14फीसदी) तंबाकू कंपनियों के थे।
डाॅ० सुनील पाडेय, राज्य नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम, ने कहा ‘‘सभी प्रकार के तंबाकू मृत्यु का कारण बनते हैं, चाहे वे वैध रूप से बेचे गए हों या अवैध रूप से उनका व्यापार किया गया हो।‘‘ ‘‘अवैध तंबाकू व्यापार से तंबाकू उत्पाद संवेदनशील समूहों जैसे बच्चों, किशोरों और सुविधावंचित समुदायों के लिए सस्ते और आकर्षक हैं। बिना कर चुकाए और तस्करी किये गए तंबाकू के कारण सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। यह भी सर्वविदित है कि राज्य में अन्य गंभीर व्यसनों के लिए तंबाकू का प्रयोग एक प्रवेश द्वार है।‘‘

डाॅ० विनय गुप्ता, विभागाध्यक्ष, के.जी.एम.यू. ने कहा कि तम्बाकू से सेवन से दाँतों व मुंह के कैंसर की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं तथा तम्बाकू उत्पादो के प्रभावी नियंत्रण से इसमें कमी लायी जा सकती है।
एस.पी. पाठक, राज्य सलाहकार, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम ने कहा कि तम्बाकू व अन्य व्यसनों के सेवन से मानसिक स्वास्थ्य पर लगातार बुरा असर पड़ रहा है। कार्यक्रम में गिरी अध्ययन संस्थान के विद्यार्थी तथा विविध संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

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