आज का उद्यमी कल का मार्गदर्शक है-डॉ. एन.कलैसेल्वी

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम(एमएसएमई) भविष्य के ग्रोथ इंजन हैं

दीर्घकालिक परिवर्तनहेतु सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमईएस)को एक साथ लाने के लिए डीएसआईआर-सीआरटीडीएच सम्मेलन

आज का उद्यमी कल का मार्गदर्शक है- डॉ. एन.कलैसेल्वी

दो दिवसीय डीएसआईआर-सीआरटीडीएच सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर), केंद्र सरकार सचिव एवं वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद(सीएसआईआर) महानिदेशक डॉ. एन.कलैसेल्वी ने सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) लखनऊ मे कही।

ं उन्होंने कहा कि आरटीडीएच,वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर)का मौलिक विचार है। यह एक योजना है जिसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमईएस)द्वारा अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है । यह हब सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को नए/उन्नत उत्पाद/प्रक्रिया विकास एवं कौशल वृद्धि संबंधी कार्यों को प्रारंभ करने की सुविधा प्रदान करते हैं।
डॉ. कलैसेल्वी ने कहा कि एमएसएमई तथा सीआरटीडीएच प्रतिनिधियों से हैंड-होल्डिंग एवं समन्वय तंत्र को अधिक सुदृढ़ करने हेतु आग्रह किया, क्योंकि आज मानव जाति के सामने आने वाली गतिशील चुनौतियों हेतु सहयोगी और चिरस्थाई प्रौद्योगिकी समाधान के माध्यम से भविष्य में भारत एक विकसित देश में परिवर्तित हो रहा है। डॉ. एन.कलैसेल्वी ने बताया कि दो दिवसीय कॉन्क्लेव देश के 14 राज्यों में फैले 18सीआरटीडीएच केंद्रों के लाभार्थी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों एवं समन्वयकों का एक साथ आना है।

इस अवसर पर देश के विभिन्न सीआरटीडीएच केंद्रों की सफलताओं को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया जिसमें कुछ उल्लेखनीय प्रौद्योकियों को प्रदर्शित किया गया जिनमें जीवविज्ञान से लेकर सामग्री अनुप्रयोगों तक नए रसायनों, ऊर्जा अनुप्रयोगों हेतु सस्ती मशीन प्रौद्योगिकियां, उत्प्रवाहएवं प्रदूषण नियंत्रण तथा स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित प्रौद्योकियां सम्मिलित हैं।
प्रदर्शनी में केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया कार्यक्रमों की दिशा में सीआरटीडीएच एवं एमएसएमई के एक साथ कार्य करने में प्राप्त उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया।

इससे पूर्व डॉ. भास्कर नारायण, निदेशक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने सभा का स्वागत करते हुए सुझाव दिया कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमएवं व्यक्तिगत उद्यमियों के साथ कार्य करने के अतिरिक्त विभिन्न सीआरटीडीएच केंद्रों को एक दूसरे के बीच संबंध भी स्थापित करना चाहिए ताकि वे अपने स्वयं के डोमेन क्षेत्रों से बाहर के उद्योगों की विविध प्रकार की आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सक्षम हो सकें। डॉ. भास्कर ने कहा कि उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं को पूर्ण करने हेतु वर्तमान प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाना ही अग्रगामी मार्ग है।

उद्घाटन सत्र,विशिष्ट अतिथि, डॉ. सुजाता चकलानोबिस, वैज्ञानिक व प्रमुख, डीएसआईआर-सीआरटीडीएच ने श्रोताओं को देश में एक नवाचार संचालित ईकोसिस्टम को बढ़ावा देने हेतु सीआरटीडीएच की उत्पत्ति के विचार और प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्रदान किया।

विशिष्ट अतिथि सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान,लखनऊ के निदेशक डॉ. राधा रंगराजन ने बताया कि संसार भर में सफल उद्यमों के पीछे नवाचार एक प्रेरक शक्ति है और देश भर में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से सीआरटीडीएच का निर्माण एक अग्रगामी मार्ग है ।

विशिष्ट अतिथि सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान, के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिल कर एक जिला एक उत्पाद के काम कर रहे ह जिससे एक जिला एक उत्पाद के सामानों में गुणवत्ता विश्व स्तरीय हो। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को चलाने में लघु एवं अत्यल्पउद्यमों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।

डॉ. आर.पार्थासारथी, नोडल वैज्ञानिक, सीआरटीडीएच,सीएसआईआर-आईआईटीआर ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।