553वें प्रकाश पर्व पर लखनऊ में विश्व के प्रथम ऐतिहासिक साहिबजादा पार्क का शिलान्यास

महापौर संयुक्ता भाटिया, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, एवं कृषि राज्य मंत्री ने रखा पहला ईट

साहिबजादा द्वार और माता गुजरी मार्ग का किया लोकार्पण।

553वें प्रकाश पर्व के शुभ अवसर पर लखनऊ के आलमबाग स्थित गुरुद्वारा आलमबाग के समक्ष महापौर संयुक्ता भाटिया के प्रयास से बन रहे विश्व के प्रथम साहिबजादा पार्क का शिलान्यास महापौर संयुक्ता भाटिया ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख के साथ नारियल फोड़ कर किया।

इस मौके पर महापौर संयुक्ता भाटिया ने देश के प्रथम साहिबजादा पार्क की पहली ईंट रख शिलान्यास कर कार्य का शुभारंभ भी किया साथ ही मुख्यमार्ग से साहिबजादा पार्क तक सड़क का नामकरण भी चार साहिबजादों को धर्म और राष्ट्ररक्षा के संस्कार देने वाली उनकी दादी माँ गुजरी देवी के नाम पर माता गुजरी मार्ग एवं साहिबजादा पार्क के सामने बने द्वार को साहिबजादा द्वार का लोकार्पण भी महापौर संयुक्ता भाटिया, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और राज्यमंत्री बलदेव सिंह ने किया।

ज्ञात हो कि महापौर संयुक्ता भाटिया जी के नेतृत्व में नगर निगम ने गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों के अतुल्य बलिदान को नमन करते हुए उनकी शहादत को अगली पीढ़ी तक स्मरण कराने के उद्देश्य से राष्ट्र का प्रथम साहिबजादा पार्क बनाने की घोषणा की थी। महापौर के प्रयास से साहिबजादो के अद्वितीय बलिदान को स्मरण करते हुए मा० मुख्यमंत्री जी ने भी मुख्यमंत्री आवास पर चार साहिबजादा दिवस मनाया था।
चार शहीबजादों के इस अदम्य साहस और त्याग को इतिहास में उचित स्थान दिलाने के ही उद्देश्य से लखनऊ में आलमबाग स्थित गुरुद्वारा के समक्ष जमीन पर प्रथम साहिबजादा पार्क बनाने का निर्णय महापौर संयुक्ता भाटिया द्वारा सिख समाज की मांग पर लिया गया था। लेकिन वह जमीन रेलवे की होने के कारण नगर निगम उसमे निर्माण कराने में असमर्थ था। महापौर के अथक प्रयास से रेलवे के अधिकारियों से कई स्तर की वार्ता के बाद रेलवे और नगर निगम के मध्य समझौता हस्ताक्षरित हुआ जिसके तहत अब उक्त स्थल पर नगर निगम पार्क बनाएगा। जिसका शुभारंभ आज गुरु नानकदेव के 553वें प्रकाश पर्व पर किया गया।

इस मौके र उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि साहिबजादों ने अपनी वीरता और अपने आदर्श से एक ऐसा अदभुद उदाहरण प्रस्तुत कर दिया, जो आज भी हर किसी के लिए अनुकरणीय है। गुरु गोविंद सिंह के चारों साहिबजादों ने इस देश की खातिर, अपने धर्म की खातिर हंसते-हंसते अपना जीवन बलिदान कर दिया, लेकिन उन्होंने अन्याय के आगे कभी भी झुकना स्वीकार नहीं किया। महापौर ने आगे कहा कि गुरु गोविंद सिंह के चारों साहिबजादों की शहादत को जितना भी नमन किया जाए, वह कम ही होगा। वास्तव में इन चारों साहिबजादों के बलिदान की यह कहानी युवा पीढ़ी को अपने देश से, अपने धर्म से, अपने वतन से प्रेम करने का संदेश देती है। हमारे प्रधानमंत्री जी ने भी साहिबजादों के बलिदान दिवस को श्वीर बाल दिवसश् मनाने की घोषणा की है।

बलदेव सिंह औलख ने बताया कि साहिब श्री गुरु तेगबहादर जी की धर्मपत्नी, गुरु गोबिन्द सिंह जी की माता व चार साहिबज़ादो की दादी श्माता गुजरी जीश् का देश को मुग़लों से आज़ाद कराने में विशेष योगदान है। इतिहास गवाह है की छोटे साहिबज़ादो के संग ठडें बर्ु्ज में क़ैद दादीमाँ ने किस तरह की शिक्षा दोनों छोटे साहिबज़ादो को दी होगी कि उन्होंने दीवार में ज़िन्दा चुने जाना क़बूल किया पर जबरन इस्लाम धर्म नहीं स्वीकार किया। अतः ऐसी महान शख़्सियत की याद को यादगार बनाने के लिये नगर निगम द्वारा बनाये जा रहे “चार साहिबज़ादा पार्क” में आने वाले मार्ग का नाम “माता गुजरी मार्ग” कर आज उनको भी हम शत् शत् नमन करते हैं।

दशमेश पब्लिक स्कूल के बैंड ने बैंड धुन बजाकर सबका स्वागत किया।

इस शुभ अवसर महापौर संयुक्ता भाटिया संग उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, सुरेश कुमार सप्रा, नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह, केंद्री सिंह सभा के अध्यक्ष निर्मल सिंह, पार्षद गिरीश मिश्रा, नामित पार्षद सरबजीत सिंह, परमिंदर सिंह सदस्य अल्पसंख्यक आयोग, अलमबग गुरुद्वारा से मंजीत सिंह तलवार, रंजीत सिंह, सतनाम सिंह सेठी, अरविंदर कोहली, संदीप आनंद, गुरमीत सिंह साहनी, रतपाल सिंह गोल्डी, सुरेंदर सिंह मोनू, हरजीत सिंह, सर्वजीत सिंह अवध कोलीजेट, विनोद रत्रा, अनिल अग्रवाल, अनिल विरमानी, आर के बत्रा, सभी गुरुद्वारों के प्रबंधक सहित सिख समाज के सैकड़ों कार्यकर्ता और सिंधी आश्रम से साई हरीश लाल के साथ सैकड़ों भक्तगण, जैन समाज के मुखी शुशील जैन, रविदास मठ के मुखी, कई सेवा सोसाइटी के प्रबंधक गण मीडिया प्रभारी सरदार हरजीत सिंह सहित लखनऊ के अन्य गणमान्य जन मौजूद रहें।