Sat. Jul 11th, 2020

यू.पी. सरकार करोड़ों गरीबों, मजलूमों, प्रवासी श्रमिकों/मजदूरों व छोटे किसानों आदि के हितों के सम्बन्ध में ठोस कार्रवाई करे- मायावती

केन्द्र व खासकर यू.पी. सरकार काफी दयनीय हालत में जी रहे करोड़ों गरीबों, मजलूमों, प्रवासी श्रमिकों/मजदूरों व छोटे किसानों आदि के हितों के सम्बन्ध में ठोस कार्रवाई करने की चिन्ता करें ताकि तमाम सरकारी घोषणायें/वायदे/योजनायें केवल हवा-हवाई, कागजी व खानापूर्ति वाली होकर ना रह जाएं। यह बात बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश मायावती ने जारी वेब मीडिया प्रेसवार्ता के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि देश के खासकर छोटे व मझोले किसान वर्ग भी वर्तमान में लाॅकडाउन के साथ-साथ आंधी, तूफान, बरसात व टिड्डियों की कुदरती मार से काफी ज्यादा दुःखी व परेशान है। उनका जीवन भी काफी त्रस्त है। उनके दुःख-दर्द को दूर करने व उनके हितों के सम्बंध मंे भी केन्द्र व राज्य सरकारों ने जो भी घोषणायें की हैं, योजनायें बनाई हैं, आर्थिक मदद आदि के वायदे किये हैं, उन्हें भी जमीन पर अमलीजामा पहनायें ताकि उन्हें थोड़ी राहत प्राप्त हो सके।

सुश्री मायावती ने कहा कि केन्द्र सरकार नये उद्योग-धंधे शुरू कराने की बात कर रही है, यह अच्छी बात है व इसका स्वागत है परन्तु उसमें समय लगेगा। इसलिए वर्तमान समस्या का फौरी समाधान तभी निकल सकता है जब दिनंाक 24 मार्च 2020 से बन्द देशव्यापी लाॅकडाउन के कारण बंद हुए तमाम उद्योग-धंधों को दोबारा फिर से चालू कराया जाएगा। मंै समझती हूँ कि जो उद्योग-धंधे व कारोबार पहले से स्थापित हैं, उन्हें ही चालू कराकर पटरी पर ला दिया जाए तो यह सरकार का बड़ा उपकार होगा।
इसके अलावा पंजाब सहित कई राज्यों द्वारा प्रवासी श्रमिकों/मजदूरों को वापस बुलाने की खबर का नोट लेते हुए सुश्री मायावती ने कहा कि लाॅकडाउन के कारण जब श्रमिकों को सैलरी नहीं मिलने के कारण इन्हें काफी लम्बे समय तक अनेकों प्रकार की दिक्कत-परेशानी झेलनी पड़ रही थी, वे जब भूखे मर रहे थे तब तो इन राज्य सरकारों ने इनका कुछ ख्याल नहीं किया जबकि यह उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी बनती थी। उस भीषण संकट के समय में अगर राज्य सरकारें उन्हें कुछ धन उपलब्ध करा देती या कुछ उधार ही उपलब्ध करा देती तो वे भूखे-प्यासे तड़पते लोग हजारों किलो मीटर दूर वापस अपने घर लौटने को क्यों मजबूर होते। और अब जब इन प्रवासी श्रमिकों के बिना काम नहीं चल पा रहा है तो इन्हें वापस बुलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रवासी श्रमिकों के साथ इस तरह का खिलवाड़ व उनके जीवन सम्मान- स्वाभिमान के साथ मजाक क्यों किया जा रहा है। वे लोग गरीब जरूर हैं, मगर इन्सान तो हैं।

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