Sat. Jul 11th, 2020

किसानों की सबसे बड़ी समस्या कृषि उत्पादों के विपणन की है -कृषि उत्पादन आयुक्त

 

बरसात में चारे एवं भूसे का सुरक्षित भण्डारण एवं आश्रय स्थलों में मृत पशुओं का प्रोटोकाल के अनुसार निस्तारण किया जाए
-अपर मुख्य सचिव कृषि

किसानों द्वारा पर्याप्त उत्पादन किया जा रहा है किन्तु उनकी सबसे बड़ी समस्या कृषि उत्पादों के विपणन की है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान 27 प्रतिशत है। प्रदेश के किसानों ने कोविड-19 संक्रमण के कठिन दौर में अपने परिश्रम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बल प्रदान किया है। यह बात कोविड-19 के कठिन समय में बस्ती, आजमगढ़, गोरखपुर, अयोध्या एवं देवीपाटन मण्डल की खरीफ उत्पादन गोष्ठी में कृषि उत्पादन आयुक्त ने आलोक कुमार ने लखनऊ के योजना भवन स्थित एन0आई0सी0 केन्द में कही।

उन्होंने कहा कि किसान को सभी विभागों के कार्यो का केन्द्र बिन्दु के रूप में मानते हुए कृषि, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य, दुग्ध आदि सभी गतिविधियों की समन्वित कार्य योजना तैयार कर उसे क्रियान्वित किया जाये। जिससे किसान को विभिन्न कार्यालयों में अनावश्यक रूप से भाग-दौड़ न करनी पड़े। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जनपद में प्रमुखता से होने वाले उत्पाद विशेष को चिन्हित करते हुए उनके प्रसंस्करण एवं मूल्य संवद्र्वन की कार्य योजना बना कर क्रियान्वित करायी जाये।
आलोक सिन्हा ने कहा कि प्रत्येक जनपद के कृषि विज्ञान केन्द्र पर किसी एक विशिष्ट विधा को अपनाकर उसे केन्द्र पर प्रमुखतः से प्रदर्शित करनेे के लिए प्रोजेक्ट तैयार कराकर आर0के0वी0वाई0 योजना से क्रियान्वित कराने के निर्देश दिये। साथ ही किसान उत्पादक समूहों का गठन कराने तथा विभिन्न विभागों की ट्रेनिंग को कन्वर्जेन्स कराकर उनका क्षमता विकास करने हेतु प्रशिक्षण कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश मंे कृषि क्षेत्र में इस समय खाद्य प्रसंस्करण मात्र 06 प्रतिशत हो रहा है। जब कि भारत सरकार द्वारा लक्ष्य 20 प्रतिशत तय किया गया है। विकसित देशों में कृषि उत्पादों का खाद्य प्रसंस्करण 35 से 40 प्रतिशत तक होता है। बिना खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा दिये और उसकी मार्केट लिंकेज कियेे किसानों की आय मंे वृद्वि संभव नहीं है। प्रदेश सरकार इस दिशा में निरन्तर प्रयासरत् है। जरूरत है कि जिले स्तर पर इसके लिए कार्य योजना बनाकर क्रियान्वित की जाये।
इसके पूर्व गोष्ठी में 5 मण्डलों के मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों द्वारा अपने मण्डलों एवं जनपदों की समस्याओं को रेखांकित किया गया। जिसमें जनपदों में विभागीय कर्मचारियों की कमी, प्रदेश के सम्बन्धित जनपदों में उर्वरकों की उपलब्धता के लिए रैक प्वाइंट, भण्डारण के लिए गोदामों की कमी, रबी एवं जायद मक्का की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद कराने की व्यवस्था कराने का अनुरोध मुख्य रूप से किया गया। प्रमुख सचिव, कृषि देवेश चर्तुवेदी ने कहा कि गोष्ठी में अधिकारियों द्वारा बतायी गयी समस्याओं के निराकरण हेतु शासन द्वारा गम्भीरता से विचार किया जायेगा। उन्होंने पशु आश्रय स्थलों में प्राकृतिक रूप से मृत पशुओं के प्रोटोकाल के अनुसार निस्तारण कराने, बरसात में क्षेत्र में सुरक्षित रख-रखाव करने तथा भूसे एवं चारे के सुरक्षित भण्डारण के निर्देश दिये। गोष्ठी में निदेशक, मत्स्य एवं पशुपालन ने अपनी विभागीय योजनाओं की चर्चा की तथा अधिकारियों से जिलों में प्रभावी क्रियान्वयन कराने की अपेक्षा की। जनपदों से किसानों ने फल एवं सब्जियांे के उन्नत बीजों, विधायन एवं प्रसंस्करण सुविधाओं तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में केले की खेती की संभावनाओं को देखते हुए टिस्यू कल्चर लैब की अपेक्षा की तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं में अनुदान पर उपलब्ध कराये जाने वाले कृषि यंत्रों के अनुदान की धनराशि को क्रय करते समय ही समायोजित कराने हेतु व्यवस्था कराने के अनुरोध किये।
गोष्ठी में नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज फैजाबाद के वैज्ञानिकों ने खरीफ मौसम में उगायी जाने वाली फसलों, फल एवं सब्जियों के उत्पादन तकनीकी तथा कीट रोग नियंत्रण एवं रख-रखाव के लिए विस्तार में जानकारी दी। गोष्ठी में निदेशक पशुपालन डा0 एस0के0 श्रीवास्तव, निदेशक मत्स्य, एस0 के0 सिंह, निदेशक राज्य कृषि प्रबंध संस्थान डा0 बी0पी0 सिंह, प्रबंध निदेशक बीज विकास निगम डा0 राम शब्द जैसवारा एवं अन्य विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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