Wed. Jun 26th, 2019

सोचि समझि कै आपन बटन दबाव रे, आयगा चुनाव भइया-आयगा चुनाव रे ।अशोक अज्ञानी

 

काव्य संध्या एवं लोकरंग कार्यक्रम

लखनऊ, मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय, उ0प्र0 एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, संस्कृत संस्थान, भाषा संस्थान, उर्दू अकादमी, सिन्धी अकादमी, पंजाबी अकादमी, दूरदर्शन एवं आकाशवाणी एवं सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0 के संयुक्त तत्वावधान में काव्य संध्या एवं लोक रंग कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में किया गया।

काव्य पाठ करते हुए सरदार त्रिलोचन सिंह ‘चन‘ ने पढ़ा – वोटो के दम पर नई होगी राहे, नया जोश नई होश नयी होगी चाहे, थामेगे हम पिछड़ो की भी वाहे।
मुईद रहबर ने पढ़ा -जो वोट नहीं देता इलेक्शन में किसी को, इस मुल्क में रहने का वो हकदार नहीं है।
सैफ बाबर ने पढ़ा -न हिन्दू ही नजर आएंे, न मुस्लिम ही ये दिखते है गरीबी का अजब मजहब अजब पहनावा होता है।
डाॅ0 मखमूर काकोरवी ने पढ़ा -पाँच वर्षों बाद ये मौका मिला है आपको, वोट देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
श्री जयकृष्ण तुषार ने पढ़ा -मजबूती दे राष्ट्र को वोटर का ईमान, लोकतंत्र के यज्ञ में आहूति है मतदान।
अशोक अज्ञानी ने पढ़ा -सोचि समझि कै आपन बटन दबाव रे, आयगा चुनाव भइया-आयगा चुनाव रे ।
विजय कर्ण ने पढ़ा -सब दानांे में श्रेष्ठ दान है मतदान, है मानो भाई, इससे बढ़कर कोई न दूजा मान सुनलो भाई। कृत्वा न वदृढ़संकल्पम्, रचयामो नव जनतन्त्रम्, रचयामो नवमितिहासम्।।
देवकीनन्दन शान्त ने पढ़ा – हर चुनाव में मतदाताओं, मत अधिकार मिलत है, मतदाता के मन कौ सुमन, बीच चुनाव खिलत है।। जनता-जागरूक भई जब से, अत्यशी अंग-अंग हिलत है। शान्त किसान, ज्वहन प्रत्यासी, बीच शहीद ढिलत है।
सुनीता सिंह ने पढ़ा -सब दानों में सबसे बढ़कर, महादान मतदान है। लोकतंत्र की पावनता का, अनुपम, ये प्रतिमान है। अधिकारों के संग जुड़े कर्तव्यों को पहचान लो, माताओं बहनों के संग मे, बन्धु तुम भी जान लो, एक-एक मत की अपनी गरिमा होती है, बूँद-बँूद की सागर में महिता होती है, समझ रहे हो जान रहे हो महिमा को भी मान रहे हो। फिर क्यों महायज्ञ में, उदासियों की तान है ? सब दानों में सबसे बढ़कर, महादान मतदान है।
दयानन्द पाण्डेय ने पढ़ा -आप घर से निकलिए भी हम दुनियाँ बदलने जा रहे है, वोट डाल कर हम अपनी बेहतर दुनियाँ बनाने जा रहे हैं। चाहिए जैसे साफ हवा, साफ पानी, हरी धरती, नीला आकाश, वोटर के हथियार से पर्यावरण का बिगड़ा संतुलन बदलने जा रहे हैं।
हरिमोहन वाजपेयी ‘माधव‘ ने पढ़ा -सोच समझ कर बटन दबाना, रखकर इतना ध्यान, हमारी ताकत मतदान, हमारी ताकत है मतदान।
सर्वेश अस्थाना ने पढ़ा -फिर चुनाव है निकट आ रहा सावधान हो जाओ, लोकतंत्र की रक्षा के हित फौरन बटन दबाओ, वोट डालने की खातिर यदि आप नहीं आयेंगे, प्रजातंत्र की रक्षा फिर तो कैसे कर पायेंगे। कहता है स्माईल मैन सब हंसे और मुस्कायंे लेकिन सबसे पहले आयें मन की बटन दबायें।।मुख्य अतिथि के रूप में पधारे जितेन्द्र कुमार, प्रमुख सचिव भाषा, उ0प्र0 ने अपने सम्बोधन में कहा – मतदान बहुत बड़े उत्तरदायित्व का कार्य है। कवियों की नजर बड़ी पैनी होती है। आज का मतदाता बहुत विश्लेषण करता है। हमें मतदान प्रतिशत को बढ़ाना है। मतदाता को धैर्य के साथ मतदान करना चाहिए। कवियों की रचनाओं से अवश्य ही मतदाताओं में जागरूकता होगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जितेन्द्र कुमार, प्रमुख सचिव, भाषा, शिशिर, निदेशक, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान एवं सूचना विभाग, अवनीश कुमार, अपर मुख्य सचिव, डाॅ0 ब्रह्मदेव राम तिवारी, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, योगेश्वर राम मिश्र, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, दिनेश गर्ग, सहायक निदेशक सूचना विभाग, श्रीनिवास त्रिपाठी, व0वित्त एवं लेखाधिकारी, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान एवं सूचना विभाग, राममनोहर त्रिपाठी, सहायक निदेशक, सूचना एवं सीमा गुप्ता, सूचना अधिकारी की उपस्थिति में दीपप्रज्वलन माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्पण के उपरान्त सुश्री रंजना मिश्र ने वाणी वन्दना एवं मिर्जापुरी कजरी, अवधी कजरी, फाग और चैती की धुन पर गीतों की संगीतमयी प्रस्तुति भी की जिनके माध्यम से मतदाताओं को जागरुक करने का प्रयास किया।

समारोह का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ0 अमिता दुबे, सम्पादक, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने किया।
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