Wed. Jun 26th, 2019

उच्च पदों व संस्थानों में बैठे लोग सत्ता के आगे नतमस्तक मायावती


देश बड़ी मायूसी के साथ यह देख रहा है कि उच्च पदों व संस्थानों में बैठे लोग किस प्रकार से सत्ता के आगे नतमस्तक हो जाते हैं जिसका ख़मियाजा आखिर में देश की उन करोड़ों जनता को भुगतना पड़ता है। जिनके हित की चैकीदारी व रखवाली के लिए इन संस्थाओं/संस्थानों को संविधान ने जन्म दिया है। यह बात लोकसभा आमचुनाव के आये नतीजे पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए अपने मीडिया को बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश मायावती ने जारी बयान में कही।

मायावती ने कहा कि देश में लोकसभा की कुल 543 सीटों में से ख़ासकर उत्तर प्रदेश की 80, बिहार की 40 व पश्चिम बंगाल की 42 सीटों पर अर्थात कुल मिलाकर इनकी 162 लोकसभा की सीटों पर यहाँ के करोड़ों ग़रीबों व मेहनतकश लोगों ने काफी ज़बर्दस्त तौर पर संगठित होकर बीजेपी एवं नरेन्द्र मोदी की अहंकारी, निरंकुष व इनकी अधिकांशः मामलों में रही जनविरोधी सरकार के ख़िलाफ काफी डटकर चुनावी लड़ाई लड़ी है और जिसके आधार पर ही पूरे देश में यह आम धारणा बन गयी थी कि खासकर इन तीनों राज्यों के कारण ही अब मोदी सरकार को लोकसभा आमचुनाव में ना तो पूर्ण बहुमत मिलेगा और ना ही इनकी सरकार दोबारा बन पायेगी।
मायावती ने कहा कि आज लोकसभा आमचुनाव का परिणाम जनभावना व जन अपेक्षाओं के ठीक इसके उल्टा ही आया है, यह केवल सोचने व समझने की ही बात नहीं है बल्कि इसके साथ-साथ देश की आमजनता को यथास्थितिवादी व पूँजीवादी समर्थित गुलामी वाली व्यवस्था को बदलने के लिए और भी कुछ करने व आगे ओर भी बड़ी लड़ाई लड़ने को मजबूर करता है।
मायावती ने कहा कि जब देश की सारी व्यवस्था/संस्था आदि निरंकुश सरकार के सामने घुटने टेकने लगे तो तब फिर अन्त में देश की जनता को खड़ा होना पड़ता है, जिस सम्बन्ध में भारत का राजनीतिक व चुनावी इतिहास काफी धनी है और सारी दुनिया के लिए यह एक मिसाल भी है। साथ ही, वोट हमारा, राज तुम्हारा, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा का संघर्ष अपने भारत देश में कोई नई बात नहीं है। इस संघर्ष ने कई उतार-चढ़ाव देखें है और अच्छी ख़ासी सफलता भी अर्जित की है और इसके फलस्वरूप ही फिर देश के राजनीतिक इतिहास में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन भी हुये और समाज के उपेक्षित वर्गों के लोगांे की सत्ता व सरकार में कुछ हद तक भागीदारी भी बढ़ी है लेकिन दुःख की बात यह है कि इसे भी अब ई.वी.एम. (म्ण्टण्डण्) के माध्यम से वर्तमान सत्ताधारी पार्टी ने अर्थात् बीजेपी ने पूरेतौर से हाईजैक कर लिया है।
देष के लोकतंत्र के व्यापक हित में वे यह फैसला लेने के लिए क्यों आनाकानी कर रहे है। इससे चुनावी बेईमानी व धांधली की आषंका और भी ज्यादा प्रबल (गंभीर) हो जाती है।
जहाँ तक गठबन्धन का उत्तर प्रदेश में कुछ सीटें जीतने का सवाल है तो यह बीजेपी की पहले से ही सोची-समझी साजिश रही है कि कुछ सीटों पर ई.वी.एम. में गड़बड़ी नहीं की जाये जिससे कि चुनाव परिणाम पूरी तरह से प्रभावित होता हुआ नजर ना आये ताकि अन्य तमाम् सीटों पर की जाने वाली गड़बड़ी के सम्बन्ध में कोई ऊँगली ना उठ सके। ऐसा इन्होंने पहले भी किया है और इसीलिए ई.वी.एम. के बजाए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की लगभग सभी विपक्षी पार्टियों की मांग को ना तो बीजेपी खुद मान रही है और ना ही चुनाव आयोग को मानने दे रही है।
और अब ऐसे में चुनावों को बैलेट पेपर से ही कराये जाने की मांग पर माननीय सुप्रीम कोर्ट को भी गम्भीरतापूर्वक जरुर सोच-विचार करना चाहिये वरना फिर भारत के लोकतन्त्र की इज़्ज़त यहाँ जातिवादी व पंँूजीवादी व्यवस्था वालों के हाथों में ही लगातार लुटती रहेगी और फिर एक व्यक्ति, एक वोट व हर वोट की एक समान कीमत की भी इस अति-मानवतावादी संवैधानिक व्यवस्था का सही मतलब ही नहीं रह जायेगा।
इसके साथ ही अब समय आ गया है कि वोट के अधिकार को मौलिक अधिकार में भी शामिल किया जाये ताकि उसी के अनुरुप देश की चुनावी व्यवस्था को पूरेतौर से सही, सार्थक व ईमानदार बनाया जा सके।
मायावती ने कहा कि हमारे गठबन्धन की पार्टियों के अर्थात् बी.एस.पी., सपा व राष्ट्रीय लोकदल के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, नेताओं, सांसदों व विधायकों आदि ने भी इस चुनाव में पूरे तन, मन, धन से कड़ी मेहनत व लगन से लगातार काम किया है उन सभी का मैं हार्दिक दिल से आभार प्रकट करती हूँ और इस मामले में खासकर सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने व राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख चैधरी अजीत सिंह ने भी अपनी जिस पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अपने गठबन्धन के सभी उम्मीद्वारों को जिताने की जो पूरे जी-जान से कोशिश की है तो उसके लिए मैं उनका भी पूरे तहेदिल से आभार प्रकट करती हूँ।

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