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आपातकाल न होता वे चुनावी राजनीति के क्षेत्र में न होते श्री नाईक


आपातकाल के दौरान उनकी अनुपस्थिति में उनके आवास पर तलाशी के लिये पुलिस का छापा पड़ा था मगर पुलिस की दृष्टि से किसी प्रकार का कोई आपत्तिजनक साहित्य नहीं मिला। उस समय संयोग से घर पर कोई नहीं था और उसी दिन बेटी के हाईस्कूल का परीक्षाफल घोषित हुआ था। यह बात प्रदेश अध्यक्ष ब्रज किशोर मिश्र के नेतृत्व में आपातकाल लोकतंत्र सेनानी समिति के प्रतिनिधिमण्डल भेंट के दौरान उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने राज भवन में कही।
राज्यपाल ने आपातकाल को याद करते हुये कहा कि अगर आपातकाल न होता वे चुनावी राजनीति के क्षेत्र में न होते। आपातकाल के कारण देश का काफी नुकसान हुआ। 25-26 जून, 1975 में देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया, जिसके बाद जनसंघ, समाजवादी पार्टी, संगठन कांग्रेस, सर्वोदयवादी आन्दोलन तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई कार्यकर्ता गिरफ्तार कर लिये गये। वे जनसंघ मुंबई के संगठन मंत्री थे। उन्होंने बताया कि उन्हें सत्याग्रह कराने, आपातकाल के विरोध में प्रचार-प्रसार करने, गिरफ्तार कार्यकर्ताओं के परिवारों का देखभाल करने एवं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से अन्य दलों का समन्वय करने की जिम्मेदारी दी गयी थी। उन्होंने आपातकाल के बाद पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 मोरारजी देसाई के मुंबई दौरे और जय प्रकाश नारायण के जसलोक अस्पताल में भर्ती होने का भी प्रसंग बताया।
श्री नाईक ने बताया कि उन्होंने आपातकाल के विरोध में प्रचार-प्रसार को लेकर उस घटना का जिक्र किया जिसमें अपने सहयोगी बबन कुलकर्णी, महासचिव, मुंबई जनसंघ को अपनी स्कूटर से हैण्डबिल व स्टेन्सिल लेकर मुलुंड जाने के लिए दादर स्टेशन पर छोड़ा। आधे घण्टे के बाद फोन पर श्री कुलकर्णी की हार्ट अटैक के कारण निधन की सूचना मिली। कुलकर्णी के पास जो ब्रीफकेस था उसे एक दोस्त के माध्यम से वापस मंगवाया क्योंकि उसमें हैण्डबिल में आपातकाल में अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा जेल में लिखी कविता ‘टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते‘ लिखी थी।
राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन में आपातकाल लोकतंत्र सेनानी समिति ने अनुरोध किया है कि लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम 2016 प्राविधानों के अनुसार लोकतंत्र सेनानियों को सहयात्री के साथ परिवहन निगम द्वारा संचालित वाॅल्वो, प्लैटिनम लाइन एवं स्कैनिया बसों में यात्रा करने के संबंध में अलग से निर्देश जारी किये जाये। लोकतंत्र सेनानियों को अतिदक्षता वाले चिकित्सालयों (के0जी0एम0यू0/पी0जी0आई0) में निःशुल्क चिकित्सा की सुविधा दी जाए तथा उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 2 प्रतिशत आरक्षण दिया जाये। आपातकाल को शैक्षिक पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाए।
प्रधानमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन में आपातकाल लोकतंत्र सेनानी समिति ने अनुरोध किया है कि समस्त जनपद मुख्यालयों में लोकतंत्र सेनानियों की स्मृति में विजय स्तम्भ की स्थापना कर उनका नाम अंकित किया जाए। आपातकाल को शैक्षिक पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाए तथा आपातकाल के दौरान प्राणों का न्यौछावर करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को शहीद का दर्जा दिया जाए। लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भांति सभी सुविधाएं एवं सम्मान दिया जाए। भारत सरकार की आयुष्मान योजना के अंतर्गत लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिवार को आच्छादित किया जाए।

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