Tue. Dec 10th, 2019

पारिवारिक विवादोें को सुलह-समझौते पर हल कराया जाय -न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता


पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीशों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

पारिवारिक न्यायालयों द्वारा पारिवारिक विवादों को सुलह-समझौते पर हल कराया जाय यह सबसे अच्छा उपाय है। इससे पारिवारिक कटुता समाप्त होती है और परिवार में एकजुटता का परिचय भी मिलता है। यह बात पारिवारिक न्यायालय में कार्यरत न्यायाधीशों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति शशि कांत गुप्ता ने गोमती नगर स्थित न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में कही।
उन्होंने कहा कि पारिवारिक विवादों को सुलझाने में परामर्श मुख्य भूमिका निभाता है। पारिवारिक न्यायालय का मुख्य उद्देश्य शादी से जुड़े विवादों को समझौते से शीघ्रता से सुलझाना है।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति ने कहा कि जहां न्यायालय से समझौते के आसार लगते हैं तथा दोनों पार्टियों को मान्य हो, न्यायालय समझौतों की शर्तों के अनुसार दोनों पार्टियों/पक्षों को समझने के लिए समय भी देता है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता किसी विवाद को गरिमा, आपसी सम्मान और शिष्टाचार को सुलझाने में एक प्रभावशाली सुविधाजनक माध्यम है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता न्यायालय के बोझ को भी कम करता है।
मा0 न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय इलाहाबाद पी0के0 श्रीवास्तव ने इस बात पर बल दिया कि पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीशों को समाज के प्रति संवेदनशील बनाया जाय क्योंकि समाज संक्रमण के दौर से गुजर रहा है तथा स्थिरता की ओर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि अनेक प्रकार की वैवाहिक समस्याएं हैं जिन्हें पारिवारिक न्यायालय द्वारा हल किया जा सकता है।
न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के चेयरमैन मा0 न्यायमूर्ति महबूब अली ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि पारिवारिक न्यायालय की स्थापना वैवाहिक प्रकरणों का तेजी से निपटारा करने के लिए की गई है।
इस अवसर पर न्यायिक प्रशिक्षण अनुसंधान संस्थान के निदेशक सरोज यादव, अपर निदेशक संतोष राय, अपर निदेशक (प्रशा0) राजीव माहेश्वरम सहित बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी मौजूद

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