Fri. Feb 21st, 2020

बच्चों में नैतिकता का बोध कराना हमारे हाथ में है। -राज्यपाल

 

राज्यपाल ने उत्तरायणी कौथिग मेले का उद्घाटन किया

बच्चों में नैतिकता का बोध कराना हमारे हाथ में है। बच्चे चरित्रवान नागरिक बनने का प्रयास करें। बच्चों को अन्य संस्कारों के साथ-साथ अन्न की बर्बादी न करने, पानी का दुरूपयोग रोकने और पर्यावरण का संरक्षण करना सीखना होगा। कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसके बड़ा होने तक उसकी देखभाल अवश्य करें। यह बात पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग (मेला)-2020 का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन करते उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रामलीला मैदान में कही।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की समृद्वि में लोक संस्कृतियों का विशिष्ट योगदान है, जिसमें पर्वतीय संस्कृति की अपनी एक अलग ही पहचान है। पर्वतीय धरती हमारे ऋषि-मुनियों की तपो स्थली रही है। पर्वतीय क्षेत्र का देश के स्वाधीनता आन्दोलन में भी गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्हांेने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से हमारी उत्सवधर्मी संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक राज्य की बेमिसाल सांस्कृतिक विरासत की अलग पहचान है। भारत भूमि हर राज्यों को आपस में जोड़ती है और हमारी विलक्षण संस्कृति हम सबको एक सूत्र में बांधती है। अनेकता में एकता ही हमारे देश की विशेषता है। उन्होंने मेले की प्रशंसा करते हुए कि इसके माध्यम से उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक परम्परा के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता एवं साम्प्रदायिक सौहार्द के मूल्यों को स्थापित करने का प्रयास किया गया है।
श्रीमती पटेल ने मेले में उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि बच्चों को नैतिक विकास और अच्छे संस्कार उत्पन्न करने वाली ज्ञानवर्द्धक पुस्तकों को पढ़ना चाहिए।

राज्यपाल ने इस अवसर कौस्तुभ आनन्द चंदोला का उपन्यास ‘चन्द्रवंशी’ और श्री ज्ञान पंत का काव्य संग्रह ‘बाटुई’ का लोकार्पण भी किया।
समारोह में पर्वतीय महापरिषद के अध्यक्ष भवान सिंह रावत, महासचिव गणेश चन्द्र जोशी, मुख्य संयोजक दिलीप सिंह बाफिला, संयोजक टी0एस0 मनराल सहित बड़ी संख्या में जनसमुदाय भारीर संख्या में मौजूद

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