Sat. Mar 28th, 2020

बजट में लघु उद्योगों को दिखाया सिर्फ सपनाः- पंकज कुमार

 

कॉर्पोरेट कम्पनियों की तर्ज पर स्वामित्व और सांझेदारी कम्पनियों के लिये भी टैक्स की दरे घटाई जानी चाहिए जिसके बारे में इस बजट में घोषणा नही की गई है। कॉर्पोरेट कम्पनियों के लिये तो टैक्स में और छूट देने की घोषणा की गई जिसके सापेक्ष स्वामित्व एवं सांझेदारी उद्यमियों के लिये टैक्स की दर 2 गुना यानी 30 प्रतिशत है जो बहुत अधिक है। यह बात वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा पेश किये गये यूनियन बजट पर आई0आई0ए0 के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज कुमार ने कही।

उन्होंने कहा कि आई0आई0ए0 ने टीडीएस की प्रतिक्रिया को भी सरल करने की मांग रखी थी जिस पर बजट में कुछ नही कहा गया है।
आई0आई0ए0 महासचिव मनमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रत्यक्ष कर विवादो को निपटाने के लिये ’’विवाद से विश्वास एवं सबका विश्वास’’ जिस समाधान योजना की घोषणा वित्तमंत्री ने की है वह स्वागत योग्य कदम है परन्तु इसके लिये जो 31 मार्च 2020 की समयसीमा रखी गई है वह बहुत कम है इसे बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ-साथ करदाताओं पर लागू कड़े नियमों के सरलीकरण की घोषणा भी स्वागत योग्य है। व्यक्तिगत प्रत्यक्षकर की नई प्रणाली की घोषणा जिसके अन्तर्गत अधिकतम टैक्स दर को कम किया गया है वह भी नई और अच्छी सोच लगती है परन्तु इसमें कर योग्य आय में छूट के प्रावधान समाप्त किये जाने से इसका कितना लाभ कर दाताओ को होगा यह अभी देखने की बात है
आई0आई0ए0 राष्ट्रीय सचिव सूर्य हवेलिया, ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या पर्याप्त मात्रा में धन उपलब्ध न होनेा है जिसके अनेक कारण है। इस समस्या के समाधान के लिये माननीय वित्तमंत्री के भाषण में कोई खास अथवा ठोस पहल नही की गई है। बजट में सौर-उर्जाध्वैकल्पिक उर्जा के लिये अनेक घोषणाये की गई है और धन की भी व्यवस्था की गई है यह एक स्वागत योग्य कदम है। बड़े शहरों में साफ हवा की समस्या गम्भीर होती जा रही है जिसके लिये बजट में 4 हजार 400 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया जाना भी एक अच्छा कदम है।
डी0एस0 वर्मा अधिशासी निदेशक आई0आई0ए0 ने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र के लिये 16 सूत्रीय कार्ययोजना से देश के किसानो की आय में काफी वृद्वि होगी जिससे औद्योगिक उत्पादों की मांग बढ़ेगी और छोटे उद्योगों को खास लाभ होगा। इसी प्रकार अवस्थापना योजनाओं में अगले 5 वर्षो में 100 लाख करोड़ रूपये की लागत से भी औद्योगिक उत्पादों की मांग बढ़ेगी और उद्योगों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ होगा।

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