Fri. Feb 21st, 2020

नीयत साफ हो तो व्यवस्था सुधार के लिए 70 साल कम नहीं होते- राम बहादुर

नीयत साफ हो तो व्यवस्था सुधार के लिए 70 साल कम नहीं होते, संविधान शिल्पी बाबासाहेब डाॅ0 आंबेडकर ने कहा था कि सारी खूबियों के बावजूद संविधान परिणाम देने में असफल रह जाता हैं तो संविधान नहीं, उसे लागू करने वाले जिम्मेदार होंगे। यब बात डाॅ0 अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता मंच का प्रांतीय अधिवेशन में राष्ट्रीय संरक्षक पूर्व आई0 ए0 एस0 राम बहादुर ने अपने उद्घाटन भाषण में कैपिटल, हॅाल लखनऊ कही।
उन्होंने कहा कि 70साल बाद बाबा साहेब का यह कथन सच साबित हो रहा है। मुझे पूरी उम्मीद है कि हमारे साथी बाबासाहेब के उक्त कथन को गंभीरता से लेंगे और लोकतंत्र को सुदृढ करेंगे। मुख्यवक्ता पूर्व शिक्षा निदेशक श्री अमृत प्रकाश ने अपने संबोधन मे कहा कि बाबासाहेब डाॅ0 आंबेडकर ने कहा था कि साइंटिफिक टेंपरामेंट वाली शिक्षा ही देश को महाशक्ति बना सकती है। उन्होने आगे कहा कि अगर हम शिक्षा का बजट बढ़ा दें तो रक्षा का बजट स्वतः कम हो जायेगा। भारत को युद्ध नहीं बुद्ध की जरूरत हैं। शास्त्र नहीं शास्ता की जरूरत है। अमृत प्रकाश जी स्वतः भी बुद्ध की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार मे शिद्दत से लगे रहते हैं। धम्म प्रचारक श्री के0 पी0 राहुल ने कहा कि भारत के बाहर भारत की पहचान बुद्ध की धरती के रूप में हैं। भारत के संविधान की बुनियाद बुद्ध के सिद्धान्तों पर रखी गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि वियतनाम के राष्ट्रपति हो ची मिन्ह बाबासाहेब डाॅ0 आंबेडकर को अपना आदर्श मानते थे। अमेरिका जैसे विश्वश्क्ति ने छोटे से देश वियतनाम पर आक्रमण किया और 13 साल युद्ध करने के बाद उसे अपनी सेना वापस बुलानी पड़ी और वियतनाम अविजित बना रहा। भारत को चाहिए कि बुद्ध , आंबेडकर के मार्ग पर चलकर पुनः जगतगुरू बने। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मा0 भवन नाथ पासवान ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट अशोक के राजतंत्र में लोकतंत्र था। आज के लोकतंत्र मे कुलीनतंत्र की बू आ रही है। भारत का संविधान भारत के प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जिंदगी जीने का अधिकार देता है लेकिन भारत के शासक भारत के नागरिकों को जीवित रहने मात्र की सुविधा नहीं दे पा रहे हैं। विश्व के 117 देशो मंे भुखमरी इंडेक्स मे भारत 102वें पायदान पर खड़ा हैं। एक व्यक्ति का एक वोट और एक वोट की एक कीमत का सिद्धान्त देकर बाबासाहेब आस्वस्त हो गये थे, कि अब बहुसंख्यक मांगने वाले नहीं देने वाले बन जायेगें। लेकिन उल्टा हुआ सत्ता मे वे नहीं आए जिनके पास वोट ज्यादा थे, सत्ता मे वे आए जिनके पास वोट कम थे। कारण यह रहा कि कुछ लोग खरीद़ सकते थे और ज्यादा लोग बिकने को मज़बूर थे। डाॅ0 आंबेडकर राष्ट्रीय एकता मंच ने समस्या का समाधान खोजा है। बुद्ध और आंबेडकरवादी विचार और मंच साझा करें। व्यक्ति के बजाय समाज के लिए जीना सीखें। मंच के राष्ट्रीय महासचिव इंजी0 एस0 पी0 सिंह ने कहा कि बुद्ध और बाबासाहेब को नकार कर भारत महाशक्ति नहीं बन सकता। उन्होंने बाबासाहेब के इस सिद्धान्त को याद दिलाया कि प्राकृतिक अधिकार सारे अधिकारांे से ऊपर होते हैं। दुःखद है कि भारत की सत्ता इसके विपरीत जा रही है। लोकतंत्र खतरे में है। डाॅ0 अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता मंच लोकतंत्र को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधेश्याम राम ने बाबासाहेब द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त ष्पे बैक टू सोसाइटीष् का अनुशरण करने का आवाहन किया। उन्हांेने कहा कि निजीकरण के माध्यम से जो सामंती व्यवस्था थोपी जा रही है उसका मंच पुरजोर विरोध करेगा। संगठन के प्रदेश महासचिव मो0 हनीफ ख़ान ने अपने सम्बोधन में कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार एस0सी0/एस0टी0/ओ0बी0सी0 व अल्पसंख्यक समुदाय पर दबाव बनाकर इनका उत्पीड़न कर रही है। देश में इस समय एक डर का माहौल पैदा किया जा रहा हैं। एन0आर0सी0 सी0ए0ए0 व एन0पी0आर0 के माध्यम में यह सरकार अल्पसंख्यकों व एस0सी0/एस0टी0/ओ0बी0सी0 के वोट के अधिकार का खत्म कर तानाशाह बनना चाह रही है। जिसका हमपुरजोर विरोध करते हैं। समाज की एकता और अखंडता के लिए ऐसा करना जरूरी हैं। दक्षिण भारत के प्रभारी करनम किशन ने भी अपने विचार व्यक्त किये। मंच के मण्डल अध्यक्ष ई0 राम सजीवन ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। प्रदेश अध्यक्ष आशा राम सरोज ने कार्यक्रम में आये सारे प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में सर्वश्री उ0प्र0 के विभिन्न/मण्डल/जनपद के प्रभारी एंव पदाधिकारी अपने साथियों के साथ भारी संख्या मे अधिवेशन में सम्मिलित हुये, जिसमें मुख्य रूप से प्रदेश प्रभारी, उ0प्र0 राम सिंह, नेम सिंह बहेलिया, डाॅ0 जय प्रकाश, यशपाल दोहरे, महिला अध्यक्ष अंगूरी दहाड़िया, विश्व राजनी बौद्ध, शैलेष धानुक, राज किशोर, प्रवेश कुमार, डाॅ0 अनिल कुमार, नील मणि नरसिंह राव, पीताम्बर प्रसाद, दीपक कुमार, सुरेन्द्र कुमार, संजय कुमार, दीपेष कुमार, डाॅ0 पंकज पासी, बलबीर सिंह बौद्ध, अमर नाथ, एडवोकेट भस्कार पासवान, अशीष कुमार, विशाल सोनकर, प्रमोद दोहर, राम भारत, सुभाष चन्द्र, सोहन लाल, जयकरन, राम बिरज रावत, आदि सचिवालय के समस्त पदाधिकारी श्री दुर्गा प्रसाद, आर0 पी0 सरोज, शिव बालक, सेल्स टैक्स के पदाधिकारी, मुख्तार रावत, आदित्य वर्मा, भरत अम्बेडकरी आगरा, राकेश राना गोरखपुर आदि मौजूद थे।

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