Sat. Mar 28th, 2020

सौर ऊर्जा के प्रयोग से पर्यावरण संरक्षण – रमाशंकर सिंह

ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा संरक्षण जरूरी

 

 

 

मनुष्य के जीवन में ऊर्जा की महती आवश्यकता है। ऊर्जा के बगैर विकास अधूरा है। प्रदेश में विद्युत की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसे सरकार ने विद्युत व्यवस्था में सुधार कर सबकों बिजली मिले इस पर कार्य कर प्रदेश के 2.80 करोड़ उपभोक्ताओं को बिजली देने के लिए 21,600 मेगावाट से अधिक की बिजली आपूर्ति की है। यह बात ‘‘कैपेसिटी बिल्डिंग आॅफ अरबन लोकल बाॅडीज इन एनर्जी एफिशियन्सी‘‘ विषय पर आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा राज्य मंत्री रमाशंकर सिंह पटेल ने हयात होटल लखनऊ में कही।
वर्ष 2024 तक 30,000 मेगावाट विद्युत की जरूरत पर योगी सरकार कार्य कर रही। इस समय गावों को 18 घंटे, तहसील को 20 घंटे तथा जिला मुख्यालयों को 23 घंटे से अधिक की विद्युत आपूर्ति की जा रही है। मुख्यमंत्री जी की मंशा है कि गांव हो या शहर सभी को 24 घण्टे बिजली मिले, जिससे आने वाले समय में सभी के सहयोग से गांवों को भी 24 घंटे बिजली मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में विद्युत की पीक डिमाण्ड 16500 मेगावाट थी, जो कि वर्ष 2019 में बढ़कर 21954 मेगावाट हो गई। उन्होंने कहा कि गांवों का अंधेरा दूर करने में सौर ऊर्जा का अहम योगदान रहा है। गांवों में बिजली पहुंचने से पहले ही लोग सौर ऊर्जा से अपने घर रोशन कर रहे थे। ऊर्जा संरक्षण कर हम अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकते है। सौर ऊर्जा के प्रयोग से पर्यावरण संरक्षण कर हम भावी पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण दे सकते हैं। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के लिए निवेशकों को बुलाने के लिए सौर ऊर्जा नीति बनायी गयी है। इसी प्रकार ऊर्जा सरंक्षण के लिए ऊर्जा सरंक्षण नीति बनायी जा रही है।
ऊर्जा राज्यमंत्री ने कहा कि इस समय सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली आपूर्ति का 6 प्रतिशत भाग पूरा किया जा रहा है, जिसे बढ़ाकर वर्ष 2024 तक 15 प्रतिशत किया जायेगा। वर्ष 2022 तक 10700 मेगावाट सौर विद्युत उत्पादन का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि किसान अपनेे बंजर जमीन पर भी सोलर पावर प्लांट लगाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ ही आय भी अर्जित कर सकते है। उन्होंने कहा कि कम ऊर्जा खपत वाले विद्युत उपकरण लगाने से ऊर्जा संरक्षण को बल मिला है, फिर भी हम ऊर्जा संरक्षण के लिए अधिक से अधिक प्रयास करें। उन्होंने शहरी क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के लिए विद्युत वाहनों को अपनाने का आह्वान किया।
सचिव, यूपीनेेडा अनिल कुमार ने यूपीएसडीए की विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में वर्ष 2018-19 में बिल्डिंग एवं नगर पालिका क्षेत्र मेें विद्युत खपत 262.5 करोड़ यूनिट थी, जिसमें स्ट्रीट लाईट में 90 करोड़ यूनिट एवं सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था में 172 करोड़ यूनिट थी। उन्होंने कहा कि पम्पिंग सेट ऊर्जा दक्ष पम्पिंग सेट से बदलने पर 30 से 40 प्रतिशत तथा पुरानी स्ट्रीट लाईट को एलईडी लाईट से बदलने पर 50 प्रतिशत से अधिक की बिद्युत बचत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में लखनऊ, देवीपाटन एवं अयोध्या मण्डल के विभिन्न नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारियों और अभियन्ताओं द्वारा प्रतिभाग किया गया। इस प्रकार के 07 और कार्यक्रम प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित किये जायेंगे, जिसमें 2 से 3 मण्डल सम्मिलित किए जायेंगे।
ब्यूरो आॅफ एनर्जी एफिशिएन्सी के संयुक्त निदेशक अजेन्द्र सिंह ने शहरी स्थानीय निकायों के डिमाण्ड साइड मैनेजमेंट कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए स्थानीय निकायों के अधिकारियों से एलईडी स्ट्रीट लाईट तथा ऊर्जा दक्ष पम्पों के उपयोग हेतु अनुरोध किया। ईईएसएल के आलोक मिश्रा, पुष्पेन्द्र चैधरी तथा श्री पोलाश दास ने स्ट्रीट लाईटिंग, म्युनिसिपल पम्पिंग सिस्टम एवं बिल्डिंग सेक्टर में ऊर्जा दक्षता के बारे में चर्चा की। टाटा मोटर्स के
जीशान रजा ने इलेकिट्रक वाहनों के उपयोग के बारे में चर्चा की। यूपीनेडा के राम कुमार ने ऊर्जा संरक्षण बिल्डिंग कोड के बारे में चर्चा की। कार्यशाला के दौरान यूपीनेडा के अशोक श्रीवास्तव ने यूपीएसडीए की एनर्जी सेविंग कैम्पेन पर आधारित वेबसाइट ूूूण्नचेंअमेमदमतहलण्बवउ पर प्रस्तुति दी और यह अवगत कराया कि स्थानीय निकायों को कैम्पेन में शामिल करने हेतु अलग से व्यवस्था वेबसाइट पर की जाएगी।
कार्यशाला में शहरी निकाय विभाग की उपनिदेशक रश्मि सिंह, पावर कार्पोरेशन की मुख्य अभियंता (डीएसएम) वारालिका दूबे के अलावा तीनो मण्डलों के नगर निगम एवं नगर पालिका के अधिकारियों के साथ विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

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