Fri. May 29th, 2020

.20 अप्रैल से ई-कॉमर्स को व्यापार परमिशन देना के विरोध के व्यापारी लामबंध



केंद्र सरकार के द्वारा उठाये गये लॉक डाउन में हम सभी तरह के व्यापार बन्द कर 20 अप्रैल से ई-कॉमर्स को व्यापार परमिशन पर आल इंडिया जेवेल्लेर्स -गोल्ड स्मिथ फेडरेशन के फाउंडर मेंबर विनोद माहेश्वरी ने सवाल उठाये है।

उनका कहना है कि देश एक बड़ी आपदा के दौर से गुजर रहा है कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए प्रधान मंत्री के लॉक डाउन के अनुरोध को मानते हुए जो की मानव जीवन के लिए और देश हित में आवश्यक भी है को मानते हुए देश का व्यापारी विगत एक माह से अपना व्यापार बंद कर घरों में बैठा है।
ऐसी स्थिति में जब देश भर के व्यापारियों का लाखों करोड़ रूपए का माल उनके प्रतिष्ठानों में जमा हैं सरकार द्वारा अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को 20-अप्रैल से देश में अपना व्यापार करने की अनुमति देना क्या उचित है?
आपदा की घडी में देश का व्यापारी सरकार के हर आदेश को मान रहा है हम सरकार के आदेश पर अपने कर्मचारी को पूरा वेतन दे रहे टैक्स, जीएसटी सहित बिजली गृहकर तक अदा करने को बाध्य हैं साथ ही साथ देश की गरीब जनता के लिए भोजन उपलब्ध कराने का भी स्वयं यथासम्भव प्रयास कर रहे है
हम देश के सात करोड़ व्यापारियों से पूछना चाहते हैं कि क्या सरकार द्वारा देश में ई-कॉमर्स पोर्टल की 20-अप्रैल से खुदरा व्यापार की अनुमति देना हम व्यापारियों पर कुठाराघात नहीं है?
हम देश के समस्त व्यापारियों से पूछना चाहते हैं क्या हमें सरकार के इस कदम का विरोध नहीं करना चाहिए?
देश के व्यापारी नेताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग कर देश के व्यापारियों से इस विषय पर सलाह माँगी है कि 20-अप्रैल से हम व्यापारियों को सिर्फ आवश्यक वस्तुओं के व्यापार की ही अनुमति देने पर विचार किया है किंतु इन ई-कॉमर्स कंपनियों पर कोई बैन नहीं है ये कंपनियां सभी उत्पाद फ्रीज टीवी मोबाईल ज्वैलरी आदि सभी कुछ बेचने के लिए स्वतंत्र होंगी। हम देश के व्यापारियों के साथ सरकार भेदभाव पूर्ण नीति अपनाती है तो क्या हमें सरकार के साथ असहयोग रुख अख्तिहार करना चाहिए।

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